मुंबई : कांग्रेस से निष्काषित संजय निरुपम एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। मुख्यमंत्री शिंदे की उपस्थिति में उन्होंने शिवसेना की सदस्यता ग्रहण की। कांग्रेस ने अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी बयानों के चलते उन्हें छह वर्षों के लिए निष्काषित किया था।
‘मुझे सीएम शिंदे पर भरोसा’
शिवसेना में शामिल होने के बाद, निरुपम ने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मैं 20 साल बाद फिर से शिवसेना में आ गया हूं। मेरी सांसों में शिवसेना ही रही है। हम पार्टी को मजबूत करेंगे और मुख्यमंत्री शिंदे की ताकत को बढ़ाएंगे। मुझे सीएम शिंदे पर भरोसा है, वे जो जिम्मेदारी देंगे, मैं ईमानदारी से निभाऊंगा। बता दें, 2006 तक निरुपम शिवसेना से राज्यसभा सांसद थे।
बता दें, रुपम 2005 में कांग्रेस में शामिल थे हुए और उन्हें महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव नियुक्त किया गया था। उन्होंने 2009 के चुनावों में मुंबई उत्तर लोकसभा सीट जीती, उस समय उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता राम नाइक को एक करीबी मुकाबले में हराया। उन्होंने पिछले 19 वर्षों में कांग्रेस पार्टी में विभिन्न पदों पर कार्य किया और अनबन के बाद पार्टी से बाहर होने से पहले कांग्रेस की मुंबई शहर इकाई का नेतृत्व भी किया।
कांग्रेस ने पिछले महीने निरुपम को ‘अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी बयानों’ के लिए छह साल के लिए निष्काषित कर दिया था। उससे कुछ दिनों पहले उन्होंने मुंबई उत्तर-पश्चिम सीट पर पार्टी को फैसला लेने के लिए ‘एक सप्ताह का अल्टीमेटम’ दिया था। वे इस सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे।
मुंबई उत्तर पश्चिम सीट कांग्रेस की ओर से शिवसेना यूबीटी को सौंपे जाने से थे नाराज
कहा जा रहा था कि निरुपम कांग्रेस के टिकट पर मुंबई उत्तर-पश्चिम लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन एमवीए सहयोगियों के बीच सीट-बंटवारे के समझौते के तहत यह सीट शिवसेना (यूबीटी) की झोली में चली गई। मूल रूप से बिहार के रहने वाले निरुपम ने 1990 के दशक में पत्रकारिता के जरिए राजनीति में प्रवेश किया था। वह अविभाजित शिवसेना के हिंदी मुखपत्र ‘दोपहर का सामना’ के संपादक बने। उनके काम से प्रभावित होकर शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने उन्हें 1996 में राज्यसभा भेजा। निरुपम उस समय शिवसेना के फायरब्रांड चेहरे के रूप में उभरे। उस समय शिवसेना मुंबई के उत्तर भारतीय मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी। हालांकि, उन्हें तब झटका लगा जब 2005 में उन्हें राज्यसभा सदस्य का पद छोड़ने के लिए कहा गया।
बाद में मतभेद सामने आए, जिसके बाद 2005 में निरुपम के शिवसेना छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्होंने 2009 में राम नाइक को हराकर कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मुंबई उत्तर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीता। हालांकि, 2014 में, उन्हें उसी निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के गोपाल शेट्टी के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा।
निरुपम ने 2017 के मुंबई नगर निकाय चुनावों में पार्टी की हार के बाद मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बाद, निरुपम ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में वैचारिक रूप से असंगत कांग्रेस और शिवसेना (अविभाजित) के त्रिपक्षीय महा विकास अघाड़ी के गठन का विरोध किया था। धीरे-धीरे कांग्रेस नेतृत्व से उनकी असहमति बढ़ती गई, परिणामस्वरूप पिछले महीने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।





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