मुंबई : शेयरिंग ऑटोरिक्शा चालक आम लोगों के लिए सिरदर्द बन गए हैं। ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में शेयरिंग ऑटोरिक्शा चालक न केवल यातायात के सभी कायदे कानून को ताक पर रख देते हैं, बल्कि क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं का सबक बनते जा रहे हैं। यहां ज्यादातर ऐसे चालक हैं, जिनके पास न तो आरटीओ द्वारा प्रमाणित लाइसेंस है और न ही बैच। इसके बावजूद यातायात पुलिस आखिर इन पर कार्रवाई करने से क्यों कतराती है, यह एक सोच का विषय है।
गोवंडी स्टेशन से लेकर शिवाजी नगर, बैगनवाड़ी, रफीक नगर, लल्लू भाई कंपाउंड, रोड नंबर-३, शिवाजी नगर, मंडल सिग्नल, बैगनवाड़ी सिगनल से लेकर मानखुर्द स्टेशन तक शेयरिंग ऑटोरिक्शा चलते हैं। इन सभी रास्तों पर चलनेवाले ऑटोचालक ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में तीन से लेकर ५ सवारियों को रिक्शा में बैठाते हैं, जिन पर कार्रवाई करने की बजाय यातायात पुलिस मूकदर्शक बनी रहती है। खास बात यह है कि इन सभी शेयरिंग ऑटोरिक्शा चालक में ५० फीसदी ऐसे चालक हैं जिनके पास लाइसेंस और बैच तक नहीं है और इनमें कई ऐसे भी हैं जो नशा करके रिक्शा चलाते हैं।
हालांकि, यातायात पुलिसकर्मियों को इसकी जानकारी होने के बावजूद वह इन पर कार्रवाई करने से कतराते हैं। काफी तेज रफ्तार से चलनेवाले इन ऑटोरिक्शा की चपेट में अक्सर राहगीर आ जाते हैं और हादसे का शिकार होते रहते हैं। अभी हाल ही में शिवाजी नगर सिग्नल पर एक ७५ वर्षीय बुजुर्ग को रिक्शा का धक्का लगने से गंभीर रूप से जख्मी हो गया, जिसकी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। मानखुर्द यातायात पुलिस इन हादसों से कोई भी सरोकार न रखते हुए केवल बीट चौकी में बैठकर समय व्यतीत करते हैं।





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