मुंबई : पिछली महायुति सरकार के दौरान राज्य में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर के काम शुरू हुए थे। इनमें मुंबई में धारावी पुनर्वसन प्रोजेक्ट, महालक्ष्मी रेसकोर्स में सेंट्रल पार्क, गारगाई-पिंजाल पानी की योजना, मुंबई में सड़कों को सीमेंटेड करने, सीवरेज के गंदे पानी को साफ करने के लिए 7 एसटीपी प्लांट के काम और कोस्टल रोड को मुंबई से बाहर मीरा-भाईंदर होते हुए विरार तक ले जाने की योजनाएं शामिल हैं। राज्य में महायुति सरकार की वापसी के बाद इन इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
विपक्षी महाविकास आघाडी (कांग्रेस, उद्धव गुट और शरद गुट) इन योजनाओं में भ्रष्टाचार का आरोप लगा कर इन्हें रोकने या जांच कराने की बात कह रही थी। चुनाव के दौरान महाविकास आघाडी ने जीत कर आने पर धारावी प्रोजेक्ट को रद्द करने की बात कही थी।
मुंबई में 2 लाख करोड़ की विकास योजनाएं
वहीं, मुंबई में सड़कों को सीमेंटेड करने के काम में भ्रष्टाचार का आरोप लगा कर इसकी जांच कराने और महालक्ष्मी रेसकोर्स की जमीन पर प्रस्तावित सेंट्रल पार्क में भी भ्रष्टाचार का आरोप लगा कर रोकने की बात कह रही थी। बता दें कि मुंबई में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के विकास कार्य जारी हैं या शुरू होने वाले हैं।
धारावी प्रोजेक्ट
एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने धारावी के पुनर्विकास का ठेका अदाणी की कंपनी को दिया है। करीब 600 एकड़ में फ़ैली धारावी में 80,000 घर बनाने की योजना है। जिस दिन से यह प्रोजेक्ट अदाणी को दिया गया, उसी दिन से उद्धव ठाकरे और कांग्रेस ने लाखों करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया था। राहुल गांधी ने बीकेसी के मैदान से कहा था कि धारावी में 1 लाख करोड़ रुपये की जमीन मुंबईकरों से छीनी जा रही है और छीनकर एक अरबपति को दी जा रही है। हमारी सरकार आने पर इस करार को रद्द कर दिया जाएगा। अब राज्य में एक बार फिर से महायुति सरकार बनने जा रही है। उम्मीद है कि नई सरकार के गठन के बाद धारावी प्रोजेक्ट को गति मिलेगी।





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