मुंबई। हर साल मानसून के शुरू होते ही मानसूनी बीमारियों में वृद्धि देखी जाती है। इस साल मानसून मई महीने में आ जाने के कारण जून महीने में ही मानसूनी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में काफी वृद्धि देखी गई। जून महीने में मलेरिया और गैस्ट्रो जैसे रोगों ने असर दिखाया जबकि जुलाई में मलेरिया, लेप्टोस्पायरोसिस और चिकनगुनिया के मामलों में तेज वृद्धि हुई है। जुलाई के पहले पंद्रह दिनों में मलेरिया के 633, लेप्टोस्पायरोसिस के 35 और चिकनगुनिया के 43 मरीज सामने आए हैं। इसके साथ ही इन बीमारियों की रोकथाम के लिए मनपा स्वास्थ्य विभाग ने जुलाई में 6 लाख 70 हजार 13 घरों का सर्वेक्षण किया है। बता दे कि मई महीने के आखिरी में शुरू हुई बैश से जून महीने में ही मानसूनी बीमारियों के मामलों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने लगी। मई में बारिश शुरू हो जाने से मलेरिया, डेंगू, गेस्ट्रो और चिकनगुनिया जैसे रोगों के फैलने के शुरुआत हो गई। बारिश से जगह-जगह पानी जमा हो जाने पर लेप्टोस्पायरोसिस के मामलों में वृद्धि देखी गई। जून के महीने भर में मलेरिया के 884 मरीज मिले थे, जबकि जुलाई के पहले पखवाड़े में ही 633 मरीज सामने आए। इसी तरह जून में लेप्टोस्पायरोसिस के 36 मरीज थे, जबकि जुलाई में अब तक 35 मरीज हो चुके हैं। चिकनगुनिया के मामले जून में 21 थे जो जुलाई में अभी तक 43 हो गए हैं, यानी इसमें दोगुनी वृद्धि हुई है। हालांकि जून में गैस्ट्रो के सर्वाधिक 936 मामले सामने आए थे जबकि जुलाई में अब तक केवल 318 मरीज मिले हैं, जिससे इसमें कुछ कमी देखी गई है। इसके अलावा जुलाई में डेंगू के 282, कोरोना के 127 और हेपेटाइटिस के 40 मामले सामने आए हैं।
शून्य मच्छर उत्पत्ति अभियान राष्ट्रीय कीटकजन्य रोग नियंत्रण केंद्र के निदेशक, कार्यक्रम प्रबंधक और कीटविज्ञानी ने जुलाई में मुंबई का दौरा किया था।





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