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‘जमीन घोटाले में की गड़बड़ी, इस्तीफा दें वरना…’, रोहित पवार ने शिरसाट पर लगाए गंभीर आरोप

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मुंबई : महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी और सियासी एक आम बात हो गई है। इसी सिलसिले में बयानबाजी और ज्यादा तेज तब हो गई जब शरद गुट के एनपीसी नेता और विधायक रोहित पवार ने महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पवार ने मंत्री संजय शिरसाट पर नवी मुंबई में 5,000 करोड़ रुपये की जमीन घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने मांग की है कि शिरसाट दो दिन के अंदर इस्तीफा दें, वरना गणेश चतुर्थी के बाद आंदोलन होगा। साथ ही रोहित पवार ने दावा किया कि 2024 की शुरुआत में जब शिरसाट सिडको के चेयरमैन थे, तब उन्होंने नवी मुंबई के एक परिवार (बिवलकर) को कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर जमीन अलॉट की, जिसकी कीमत करीब 5,000 करोड़ रुपये है।
पवार ने किया 1200 पन्नों के सबूत का दावा
अपने बयान में पवार ने आगे दावा किया कि उनके पास 12,000 पन्नों के सबूत हैं, जिनमें बिवलकर परिवार की 1993 की जमीन की अर्जी, सिडको द्वारा 1994, 1995 और 2010 में की गई चार बार की अस्वीकृति रिपोर्ट, कानून और न्याय विभाग की राय, शहरी विकास विभाग की चिट्ठियां और सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे शामिल हैं। पवार का आरोप है कि बिवलकर परिवार की अर्जी को चार बार खारिज किए जाने के बावजूद संजय शिरसाट ने अपने कार्यकाल के दौरान उसे मंजूरी दी, जबकि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था।
पवार ने जमीन को वापस लेने की मांग की
पवार ने आगे कहा कि यह जमीन अब बिल्डरों को बेच दी गई है, जो न सिर्फ सार्वजनिक संपत्ति का दुरुपयोग है, बल्कि न्यायिक आदेशों का उल्लंघन और जनता के विश्वास से धोखा भी है। पवार ने मांग की कि पहले से अलॉट की गई 8,000 स्क्वायर मीटर जमीन को तुरंत वापस लिया जाए और 61,000 स्क्वायर मीटर जमीन को फ्रीज किया जाए।
शिंदे पर भी साधा निशाना
इसके साथ ही उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तंज कसते हुए रोहित पवार ने कहा कि वो कहते हैं महादेव हमें बुद्धि दें और महादेव ने वाकई हमें बुद्धि दी है, जिसका हमने उपयोग कर इस घोटाले को उजागर किया है। बता दें कि रोहित पवार के बयान पर संजय शिरसाट की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, जबकि मंत्री छगन भुजबल ने कहा है कि पवार द्वारा दिए गए सबूतों की जांच जरूरी है और ऐसे मामलों को अदालत में ले जाना चाहिए ना कि सिर्फ मीडिया में उठाना चाहिए।