मुंबई : जैसे-जैसे मुंबई साल 2026 में होने वाले लंबे समय से टले बृहन्मुंबई नगर निगम चुनावों की ओर बढ़ रहा है, राजनीति का फोकस फिलहाल गठबंधनों के समीकरण, पार्टियों में टूट-फूट और नेतृत्व की खींचतान पर बना हुआ है। लेकिन इसी बीच सामने आए नए वोटर डेटा से पता चलता है कि शहर के सबसे अहम वोटर समूहों में से एक, यानी महिलाएं, अब भी चुनावी चर्चा में पीछे हैं और उनकी समस्याओं पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा।
एसेंडिया स्ट्रैटेजीज की ओर से 1,000 से ज्यादा लोगों पर किए गए शहरव्यापी सर्वे ‘बृहन्मुंबई नगर निगम इलेक्शन: मुंबई में ट्रिपल-एम प्ले’ के मुताबिक, महिलाओं को अपने इलाके के स्थानीय कॉर्पोरेटर के बारे में सबसे कम जानकारी है। सर्वे में शामिल केवल 44 फीसदी महिलाओं को अपने कॉर्पोरेटर का नाम पता था, जबकि मराठी मानुष वोटरों में यह आंकड़ा 68 फीसदी और मुस्लिम वोटरों में 60 फीसदी रहा। हालांकि, जानकारों का कहना है कि जानकारी की यह कमी महिलाओं की राजनीति में रुचि न होने का संकेत नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि उन्हें अब तक सही तरह से जोड़ा नहीं गया है।





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