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अडानी के फैसले पर अमेरिका का विरोध: नवी मुंबई एयरपोर्ट पर कार्गो शिफ्टिंग को लेकर दी चेतावनी

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मुंबई : भारत के एयरपोर्ट सेक्टर में अडानी ग्रुप का बढ़ता दबदबा अब एक अंतरराष्ट्रीय विवाद का रूप लेता दिख रहा है। आपको बता दें कि मुंबई के मौजूदा छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से कार्गो विमानों को नवी मुंबई के नए एयरपोर्ट पर शिफ्ट करने के अडानी ग्रुप के फैसले का अमेरिका ने कड़ा विरोध किया है। अमेरिकी परिवहन विभाग ने भारत सरकार को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि ये कदम द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौते का उल्लंघन है, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में तनाव आ सकता है।
क्या है पूरा विवाद
अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड ने कार्गो ऑपरेटरों जैसे फेडेक्स को निर्देश दिया है कि अगस्त 2026 से मई 2027 के बीच वे अपना परिचालन नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शिफ्ट कर लें। अडानी ग्रुप का तर्क है कि मुख्य मुंबई एयरपोर्ट पर टैक्सीवे के नवीनीकरण का काम होना है, जिससे कार्गो क्षमता 25% तक कम हो जाएगी। हालांकि अमेरिका का मानना है कि ये फैसला तकनीकी मजबूरी कम और नए एयरपोर्ट को जबरन भरने की कोशिश ज्यादा है।
फेडेक्स और द्विपक्षीय समझौते का उल्लंघन
वर्तमान में अमेरिकी कंपनी फेडेक्स मुंबई के मुख्य एयरपोर्ट से संचालित होने वाली इकलौती अमेरिकी कार्गो एयरलाइन है। बता दें कि अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि शहर के केंद्र से दूर शिफ्ट करने से एयरलाइंस के प्राइम ऑपरेटिंग स्लॉट्स प्रभावित होंगे। डीओटी के अनुसार ये कदम भारत-अमेरिका हवाई परिवहन समझौते के तहत अमेरिकी वाहकों को मिलने वाले अधिकारों का उल्लंघन करता है। अमेरिका ने साफ किया है कि अगर दबाव बनाया गया, तो वह जवाबी कार्रवाई पर विचार कर सकता है।
अडानी का दबदबा और सरकार की चिंता
अडानी ग्रुप वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा निजी एयरपोर्ट ऑपरेटर है। मुंबई के दोनों एयरपोर्ट्स पर ग्रुप का नियंत्रण होने के वजह से ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या ट्रैफिक का बंटवारा निष्पक्ष है। साथ ही इस विवाद के बीच भारत सरकार ने अडानी ग्रुप को पत्र लिखकर इस मामले का कोई सम्मानजनक समाधान खोजने को कहा है, जिससे ये मुद्दा बड़े राजनयिक संकट में न बदले।