मुंबई: मुंबई में मुलुंड के कोविड सेंटर में कोरोना संक्रमितों का इलाज कर रहीं डॉक्टर सरिता बांबरे को आज हर शख्स सलाम कर रहा है. आठ महीने की प्रेग्नेंट होने के बावजूद सरिता अपने काम में लगातार जुटी रहती हैं. सरिता बीते आठ महीनों से मुलुंड के कोविड सेंटर में तैनात हैं और मरीज़ों का इलाज कर रही हैं.
अपने इस फर्ज़ को निभाने के लिए सरिता ने अपनी छोटी बेटी को सास के पास छोड़ दिया और पति से भी दूर रहने लगीं. कोविड सेंटर तक आने में दिक्कत होती थी, इसलिए सरिता ने परिवार से अलग होकर कोविड सेंटर को ही अपना घर बना लिया.
डॉक्टर सरिता मुंबई के पास कल्याण की रहने वाली हैं. वहीं पर वह अपने पति, सास और करीब 7 साल की बेटी के साथ रहती हैं और डॉक्टर की प्रैक्टिस करती हैं, लेकिन जब लॉकडाउन लगा, उसी दौरान डॉक्टर सरिता को पता चला कि वह मां बनने वाली हैं. शुरू में उन्हें घर पर रहने की हिदायत दी गई, लेकिन लगातार जब कोरोना मरीजों का आंकड़ा बढ़ता गया तो उनके डॉक्टर वाले फर्ज ने उन्हें घर पर बैठने से मना कर दिया. डॉक्टर सरिता ने अपने घरवालों से कहा कि यह वक्त फर्ज निभाने का है. उन्हें कोरोना मरीजों का इलाज करना है वह घर पर पेट में पल रहे बच्चे के साथ नहीं रह सकतीं.
डॉक्टर सरिता के पति और उनके घर वालों ने उनके इस फैसले का साथ दिया. डॉक्टर सरिता ने कोविड अस्पताल में पेट में पल रहे बच्चे को लेकर कोरोना मरीजों का इलाज करना शुरू किया और करीब 8 महीना उन्हें कोविड सेंटर में मरीजों का इलाज करते हुए हो गए और उनके पेट में 8 महीने का बच्चा भी पल रहा है.
डॉक्टर सरिता बताती हैं कि उनके इस काम में उनके स्टाफ ने उनका बहुत साथ दिया. उनके सीनियर डॉक्टर ने उन्हें हर तरह से सुविधा देने की कोशिश की, वह भले ही कोरोना मरीजों का इलाज कर रही थीं, लेकिन उनके पेट में पल रहे बच्चे के साथ उनके स्वास्थ का पूरा जिम्मा उनके स्टाफ के तमाम लोग उठा चुके थे. उनके स्टाफ ने उन्हें किसी भी तरह की परेशानी होने नहीं दी. डॉक्टर सरिता बताती हैं कि शुरू में कल्याण से मुलुंड रोज आना जाना उनके लिए बहुत ही दिक्कत भरा होता था, इसलिए उनके सीनियर ने उन्हें यहीं पर रहने की सुविधा मुहैया कराई और उसके बाद सब कुछ ठीक हो गया. वो रोज लगातार हॉस्पिटल में मरीजों का इलाज करती रहीं. इस वक्त मुलुंड कोविड अस्पताल में वो ऑपरेशन हेड हैं और इस अस्पताल का बहुत बड़ा जिम्मा उनके पास है.
डॉक्टर सरिता के बारे में हमने उनके तमाम चिकित्सा कर्मचारियों से भी बात की. उन्होंने कहा कि सरिता उनके लिए प्रेरणा है, जो डॉक्टर 8 महीने के बच्चे को अपने पेट में पालते हुए कोविड मरीजों का इलाज कर सकती हैं, उनके इस कार्य से बहुत प्रेरणा मिलती है. डॉक्टर सरिता हंसते हुए बताती हैं कि इन 8 महीनों में इस कोविड अस्पताल का हर कर्मचारी उनके परिवार का हिस्सा बन गया है और ज्यादातर उन्हें मम्मी के नाम से पुकारने लगे हैं.





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