Home Crime विदेशियों को मिल जाता था ‘आधार’, दो गिरफ्तार

विदेशियों को मिल जाता था ‘आधार’, दो गिरफ्तार

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मुंबई : पड़ोसी मुल्कों द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का खतरा देश पर हमेशा ही मंडराता रहता है। बड़ी संख्या में बांग्लादेशी, नेपाली, पाकिस्तानी, ईरानी, अफगानी एवं दक्षिण अप्रâीकी नागरिक अवैध ढंग से हिंदुस्थान में रहते हैं। ऐसे विदेशी नागरिकों के ठगी, लूट-मार, नकली नोट, मादक पदार्थों की तस्करी जैसे अपराधों से लेकर आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता के मामले भी अतीत में सामने आ चुके हैं। इसलिए पुलिस एवं दूसरी जांच एजेंसियों से जुड़े लोग अवैध विदेशी नागरिकों की धरपकड़ का प्रयास हमेशा ही करते रहते हैं लेकिन कुछ ठग चंद रुपयों के लालच में अवैध विदेशी नागरिकों को गैरकानूनी ढंग से हिंदुस्थानी नागरिकता का सबसे बड़ा प्रमाण माना जानेवाला ‘आधारकार्ड’ बना कर देने का राष्ट्रद्रोही कृत्य करते हैं। फर्जी दस्तावेजों की मदद से विदेशी नागरिकों का आधारकार्ड बनानेवाले दो लोगों को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट- ११ ने गिरफ्तार किया है। यह गिरोह महज ५ से ७ हजार रुपए में विदेशी नागरिकों को अवैध ढंग से आधार कार्ड बनाकर देता था।
बता दें कि यूनिट-११ के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सुनील माने को फर्जी दस्तावेजों के सहारे विदेशी नागरिकों का आधारकार्ड बनानेवाले गिरोह के बारे में सूचना मिली थी। डीसीपी अकबर पठान, एसीपी पंढरीनाथ वाह्वल के मार्गदर्शन व वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सुनील माने के नेतृत्व में पीआई रईस शेख, एपीआई शरद झीने, भरत घोणे नितिन उतेकर की टीम ने मामले की जांच शुरू की। टीम ने विनोद चव्हाण व उमेश चौधरी नामक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
बताया जा रहा है कि गुड़गांव की एफएआई कंपनी को आधारकॉर्ड बनाने का लाइसेंस मिला था। बोरिवली-पश्चिम के चामुंडा सर्कल स्थित वैâनरा बैंक में एफएआई का कर्मचारी आधारकार्ड से संबंधित कार्य करता था। लेकिन उक्त कर्मचारी बैंक के अधिकारियों की जानकारी के बगैर ग्राहकों का फॉर्म भरकर उंगलियों के निशान व आंखों को स्वैâन कर लेता था तथा ग्राहकों को फॉर्म का िंप्रट दे देता था। वह फॉर्म के इनरोलमेंट नंबर से ग्राहकों को ऑनलाइन आधारकार्ड डाउन लोड करने को कहता था लेकिन असल में वह ग्राहकों का फॉर्म जमा ही नहीं करता था। इसलिए आधारकार्ड डाउनलोड नहीं होता था। बाद में वह ग्राहकों से इंट्रोड्यूसर के रूप में किसी सांसद, विधायक, नगरसेवक आदि से पहचान से संबंधित पत्र लाने को कहता था। उस पत्र की मदद से गैरकानूनी ढंग से आधारकार्ड बनाकर देता था। कोर्ट ने आरोपियों को ९ फरवरी तक पुलिस हिरासत में रखने का आदेश दिया है।