मुंबई : कोरोना वायरस के बाद अब मुंबई और महाराष्ट्र में म्यूकोमायकोसिस यानी ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों ने महाराष्ट्र सरकार और बीएमसी की चिंता बढ़ा दी है. पूरे राज्य में अब तक 2000 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 8 लोगों की मौत हो चुकी है. ब्लैक फंगस के इस खतरे से निपटने के लिए बीएमसी ने एक टास्क फोर्स की स्थापना की है. इस टास्क फोर्स में मुंबई के बड़े सरकारी अस्पतालों नायर, सायन, केईएम और कूपर के डीन के अलावा आंख, नाक, कान और गला विभाग के प्रमुखों को शामिल किया गया है. यह टास्क फोर्स आने वाले दो दिनों में ब्लैक फंगस बीमारी से लड़ने की तरकीब को लेकर एक नियमावली तैयार करेगी.
बीएमसी के आला अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक इस नियमावली के तैयार होने के बाद जरूरी दिशा-निर्देश सभी सरकारी और निजी अस्पतालों के लिए जारी किया जाएगा. इतना ही नही, इस बीमारी से ग्रसित मरीजों के इलाज के लिए बीएमसी लायपोझोमोल अंफोटेरीसीन दवा भी बड़ी मात्रा में खरीदेगी. जानकारी के मुताबिक अब तक मुंबई के सायन अस्पताल में एक महीने में ब्लैक फंगस के 32 मामले सामने आ चुके हैं यानी जितने मामले 3 सालों में आते थे, वो अब एक महीने में आ रहे हैं. इसमें से 9 मरीजों की एक-एक आंख निकालनी पड़ी, जबकि 2 मरीजों की दोनों आंखें. जानकारी के मुताबिक अगर ब्लैक फंगस एक बार नाक के अंदर आया, तो 8-10 दिनों में जान भी जा सकती है. इसी खतरे को देखते हुए बीएमसी ने टास्क फोर्स की स्थापना की. जानकारी के मुताबिक इस बीमारी के होने के बाद करीब 6 सप्ताह तक लगातार अंफोटेरीसिन बी इंजेक्शन लगवाना पड़ता है, एक इंजेक्शन की कीमत करीब 7 हजार रुपये आती है यानी एक मरीज को ठीक करने के लिए करीब 3 लाख का खर्च आता है.





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