Home Crime ६ करोड़’ की व्हेल उल्टी हुई बरामद, दो तस्कर गिरफ्तार

६ करोड़’ की व्हेल उल्टी हुई बरामद, दो तस्कर गिरफ्तार

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मुंबई, तट से काफी दूर गहरे समुद्र में रहनेवाली व्हेल मछलियों के अपशिष्ट यानी व्हेल की उल्टी इन दिनों मुंबई में कुछ ज्यादा ही पहुंचने लगी है। वैज्ञानिक भाषा में एम्बरग्रीस कहलानेवाली व्हेल की उल्टी की खरीद-बिक्री हिंदुस्थान में प्रतिबंधित है परंतु सेंट और अगरबत्ती बनाने के लिए इस्तेमाल किए जानेवाले इस दुर्लभ एवं प्रतिबंधित पदार्थ का उपयोग अब सेक्स पॉवर बढ़ाने की दवा के रूप में भी किया जाने लगा है। नतीजतन मुंबई व आसपास के क्षेत्र में एंबरग्रीस की तस्करी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे ही एक मामले में मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच की यूनिट ७ की टीम ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से ५ किलो ९१० ग्राम एंबरग्रीस बरामद हुई है, जिसकी कीमत ५ करोड़ ९१ लाख रुपए आंकी गई है।
बता दें कि यूनिट- ७ के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक मनीष श्रीधनकर को व्हेल की उल्टी की खरीद बिक्री के सिलसिले में तस्करों के आने की सूचना मिली थी। जिसके बाद डीसीपी दत्ता नलावड़े के मार्गदर्शन तथा मनीष श्रीधनकर के नेतृत्व में पीआई सुधीर जाधव व उनके सहयोगियों ने फर्जी ग्राहक भेज कर तस्करों से संपर्क किया। सौदा तय होने के बाद भांडुप-पूर्व से कांजुरमार्ग तक सर्विस रोड पर जाल बिछा कर टीम ने वहां खबरी से मिले संकेत के आधार पर दो संदिग्धों को हिरासत में लिया। उनके पास से मिले झोले से भरे रंग का मोम जैसा ठोस पदार्थ बरामद हुआ, जिसकी जांच करने पर एंबरग्रीस यानी मोम की उल्टी होने की पुष्टि हुई। दोनों आरोपियों के खिलाफ कांजुरमार्ग पुलिस थाने में संरक्षित व्हेल मछली की उल्टी की तस्करी के आरोप में मामला दर्ज किया गया। आरोपिरयों में एक मुलुंड का तो दूसरा मालाड-पश्चिम स्थित झारखंड चाल का रहनेवाला है।
लुप्तप्राय प्रजाति की स्पर्म व्हेल की उल्टी को समुद्र का खजाना या तैरता सोना भी कहा जाता जाता है। इसकी कीमत सोने से भी कहीं ज्यादा बताई जाती है। इसके पीछे का कारण ये है कि इसमें एक बिना गंध का अल्कोहल मौजूद होता है, जिसका इस्तेमाल परफ्यूम की सुगंध को लंबे वक्त तक बरकरार रखने के लिए किया जाता है। यूरोप के लोगों का मानना है कि एंबरग्रीस का टुकड़ा साथ रखने से प्लेग रोकने में मदद मिलती है। गहरे समुद्र में रहनेवाली व्हेल के शरीर से निकले एंबरग्रीस को समुद्र के किनारे आने पर कई साल लग जाते हैं। इस दौरान समुद्र के नमकीन पानी और सूरज की रोशनी के कारण यह अपशिष्ट चट्टान जैसी चिकनी, भूरी गांठ में बदल जाता है, जो मोम जैसा प्रतीत होता है। कई बार यह पदार्थ रेक्टम के जरिए बाहर आता है, लेकिन कभी-कभी पदार्थ बड़ा होने पर व्हेल इसे मुंह से उगल देती है। वैसे यह पदार्थ व्हेल के शरीर के अंदर उसकी रक्षा करता है। समुद्र में जानेवाले मछुआरों से तस्कर इसे खरीदते हैं और बाद में यह करोड़ों रुपए में बेची जाती है।