मुंबई, छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में १४ वर्षीय बच्ची के बलात्कारी को अदालत ने दस दिन पहले फांसी की सजा सुनाई थी। उसके बाद भी कई कुकर्मियों को अदालत से फांसी या उम्रवैâद की सजा मिल चुकी है। लेकिन इन सबके बावजूद देश में महिलाओं खासकर बच्चियों से बलात्कार की घटना थम नहीं रही है। इसका ताजा मामला उत्तर प्रदेश के मऊ जिले से सामने आया है, जहां पांच साल की मासूम, पड़ोसी युवक की दरिंदगी का शिकार बन गई। घर के बाहर खेल रही बच्ची को गांव के ही युवक ने सुनसान जगह पर ले जाकर दुष्कर्म किया। बच्ची के शोर मचाने पर युवक ने हत्या करने की कोशिश भी की। इस मामले में खुशनसीबी ये है कि बच्ची की जान बच गई लेकिन हर पीड़िता खुशनसीब नहीं होती। जैसा की करीब सालभर पहले राजस्थान के सिरोही जिले में हुआ था।
वर्ष २०२० में राजस्थान के सिरोही जिले में हुई ८ वर्षीय गुड़िया (काल्पनिक नाम) से रेप का मामला इन दिनों पूरे देश की मीडिया में छाया हुआ है। उस शर्मनाक मामले में अदालत ने कुकर्मी आरोपी को फांसी की सजा का पैâसला सुनाया है। लेकिन फांसी की सजा से ज्यादा चर्चा पैâसले के दौरान माननीय न्यायाधीश द्वारा की गई टिप्पणी की हो रही है। पैâसले में जज अजिताभ आचार्य ने कहा कि ८ साल की बच्ची, जो खुद का बचाव नहीं कर सकती। उसके साथ दुष्कर्म हुआ, फिर हत्या कर दी गई। यह राक्षसी कृत्य दर्शाता है कि ऐसे लोगों को समाज में जीने का कोई अधिकार नहीं है।
यह शर्मनाक घटना वर्ष २०२० में घटी थी। सिरोही जिले के अनादरा थाना क्षेत्र में एक ८ साल की गुड़िया अपने भाई के साथ घर के पास स्थित बरसाती नदी पर नहाने गई थी। बाद में भाई तो घर लौट आया लेकिन गुड़िया वापस नहीं आई। इस बारे में उनकी मां राधा (काल्पनिक नाम) ने जब बेटे से पूछा तो पता चला कि गांव में रहनेवाला नौकाराम उर्फ भारमाराम मालाराम गरासिया उर्फ धर्मा नामक युवक गुड़िया को जबरन अपने साथ ले गया था। राधा व अन्य परिजनों ने गुड़िया और नौकाराम को ढूंढ़ने की हरसंभव कोशिश की लेकिन वे नहीं मिले। अंतत: हताश होकर राधा ने अनादरा थाने में गुड़िया के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी।
पुलिस ने जब परिजनों के साथ गुड़िया की तलाश शुरू की तो अगले दिन सुबह नदी किनारे एक जगह झाड़ियों में बच्ची की लाश पड़ी मिली। मृतक बच्ची के जिस्म पर खरोंचों के निशान थे। पोस्टर्माटम के बाद पता चला कि बच्ची की रेप के बाद गला घोंटकर हत्या की गई है। जांच के दौरान पता चला कि जब गुड़िया अपने भाई के साथ नदी में नहा कर वापस लौट रही थी तभी शराब के नशे में चूर धर्मा ने उसे जबरदस्ती पकड़ लिया। इससे उसका छोटा भाई डर गया और मौके से अपनी जान बचा कर भाग खड़ा हुआ। धर्मा ने नदी किनारे मासूम के साथ दरिंदगी की। जब रेप के कारण गुड़िया लहूलुहान हो गई तब धर्मा ने गला घोंटकर उसे मौत के घाट उतार दिया और लाश को झाड़ियों में फेंककर वह मौके से फरार हो गया। इस घटना से पूरे जिले में तीव्र आक्रोश भड़क उठा। लोग आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार करके कड़ी सजा देने की मांग करने लगे। जबकि बलात्कारी हत्यारोपी वारदात के बाद फरार हो गया था। वह करीब दस दिनों तक पास के पहाड़ी जंगल में छिपा रहा। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था।
पुलिस द्वारा पकड़े जाने पर आरोपी ने सभी आरोपों से इंकार कर दिया और उल्टा पुलिस पर ही झूठे मामले में फंसाने का आरोप लगाने लगा। पुलिस ने डीएनए जांच कराई तो आरोपी का पर्दाफाश हो गया। यही डीएनए रिपोर्ट बाद में आरोपी को दोषी करार दिलाने में मददगार सिद्ध हुई। पुलिस ने मामले की ४५ दिनों में जांच पूरी कर ली और १९ नवंबर, २०२० को न्यायालय में चार्जशीट दायर कर दी। पुलिस द्वारा पेश किए गए २४ गवाहों, डीएनए एवं पुख्ता जांच रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने आरोपी नौकाराम को गुड़िया की रेप और हत्या मामले में दोषी माना था। सोमवार को विशेष पॉक्सो न्यायालय में नौकाराम के कुकर्म के लिए सजा पर सुनवाई हुई। जज अजिताभ आचार्य ने २४ वर्षीय दोषी नौकाराम उर्फ भारमाराम मालाराम गरासिया निवासी तेलपी खेड़ा, अनादरा को फांसी की सजा सुनाई।





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