बरेली, परसाखेड़ा में रहने वाले उद्यमी एसके अग्रवाल निवाड़ में पैâक्ट्री चलाते थे। २४ अक्टूबर, २०१५ की शाम को उद्यमी, उनकी पत्नी मधुलिका और घरेलू सहायिका अंशु का शव घर में मिला था। पोस्टमार्टम हुआ तो पता चला कि एसके अग्रवाल के चेहरे पर धारदार हथियार से १०, उनकी पत्नी के सिर पर पांच व सहायिका के शरीर पर १७ वार किए गए थे।
तीहरे हत्याकांड के रोंगटे खड़े कर देनेवाले इस मामले में पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। ट्रिपल मर्डर केस की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस अंधेरे में हाथ-पांव मार रही थी। मौका-ए-वारदात का जायजा लेने के बाद ये अनुमान लगाया गया कि तीन कत्ल चोरी की नीयत से किए गए होंगे। कत्ल किसने किया और कितने माल पर हाथ साफ किया? इसका भी कोई सुराग नहीं मिल सका था लेकिन पुलिस इतना जान गई थी कि चोर घटनास्थल से मधुलिका का मोबाइल फोन भी ले गए थे। पुलिस की सारी उम्मीदें उसी मोबाइल फोन पर टिक गर्इं और वारदात के कुछ दिन बाद मधुलिका का मोबाइल फोन ऑन हो गया। आईएमईआई नंबर से ये पता चल गया कि फोन में किसी एटा निवासी ओमकार नामक शख्स के नाम का सिम कार्ड इस्तेमाल किया जा रहा है। ओमकार ने मधुलिका का मोबाइल फोन उपयोग किया था। उसी के सहारे पुलिस ने पहले ओमकार, इसके बाद बाकी तीनों एटा निवासी देवेंद्र, उसके दोस्त संजू व खड़ौआ निवासी अजय तक पहुंच गई। देवेंद्र व अजय ने पुलिस के सामने जुर्म इकबाल किया था।
आगे की कहानी बेहद सनसनीखेज है। हुआ ऐसा कि अंशु और एसके अग्रवाल की पैâक्ट्री के नौकर देवेंद्र के बीच प्रेम-प्रसंग था। दोनों भागकर शादी करना चाहते थे। इसके लिए रुपए की जरूरत थी। अंशु ने देवेंद्र को बताया था कि मालकिन के पास लाखों के जेवर व नकदी हैं। मालिक लकवाग्रस्त हैं। यहां से चोरी कर किसी दूसरे शहर भाग जाएंगे।
अंशु से मिली टिप के बाद २३ अक्टूबर की रात देवेंद्र अपने दोस्तों को लेकर अग्रवाल के घर पहुंच गया। अंशु ने चुपचाप दरवाजा खोला, जिसके बाद चारों उस कोठी में दाखिल हो गए। सभी ने कोठी के दूसरे हिस्से वाले कमरे में खाना खाया। तड़के ओमकार और संजू ने बदनीयती से अंशु को कमरे में खींच लिया। उसने गुस्से में ओमकार को थप्पड़ मार दिया। इससे बौखलाकर दोनों ने अंशु पर बांका से ताबड़तोड़ वार कर दिए। उसकी आवाज सुनकर मालकिन मधुलिका आई तो उनकी भी हत्या कर दी। अंशु की हत्या के वक्त देवेंद्र दूसरे कमरों से चोरी करने चला गया था। वापस आने पर उसने विरोध किया तो आरोपितों ने उसे भी मारने की धमकी दी, जिससे वह डरकर चुप रह गया। दो हत्याएं करने के बाद आरोपितों ने अलमारी में रखे ४० हजार रुपए व मालकिन का मोबाइल फोन लूट लिए। घटना कर पहली मंजिल से उतरकर नीचे पहुंचे तो बिस्तर पर पड़े एस.के. अग्रवाल ने चोरों को देख लिया। पहचान लिए जाने के डर से आरोपितों ने उनकी भी हत्या कर दी और फरार हो गए।





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