मुंबई, उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक बलात्कारी ९९ के फेर में फंस गया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को न सिर्फ गिरफ्तार किया बल्कि उसके खिलाफ ठोस सबूतों के साथ चार्जशीट भी झटपट दायर कर दी। नतीजतन अदालत वारदात के महज ९९ दिनों के अंदर और सिर्फ १२ सुनवाई के बाद आरोपी को दोषी करार देते हुए उम्रवैâद की सजा सुना दी। यह मामला हवसी मानसिकता वाले दूसरे लोगों के लिए एक बेहतरीन उदाहरण है। उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित विशेष पॉक्सो कोर्ट ने दलित किशोरी से दुष्कर्म के मामले में दोषी युवक को सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी व्यक्ति को उम्रवैâद की सजा और १, १५, ५०० रुपए का जुर्माना लगाया है।
यह मामला बरेली स्थित किला थाना क्षेत्र का है, जहां १४ वर्षीय पीड़िता अपनी मौसी के साथ रहती है। १८ सितंबर को मौसी ने एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने पड़ोसी युवक दिनेश मिश्रा पर अपनी नाबालिग भांजी से दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था।अपनी शिकायत में मौसी ने लिखा था कि ‘पीड़िता बीते आठ वर्षों से उनके साथ रह रही है। २६ अगस्त २०२१ को रात नौ बजे वह बाजार जा रही थी, तभी रास्ते में आरोपी दिनेश चंद्र मिश्रा मिला और उसे बहाने से अपने घर ले गया। वहीं आरोपी ने उसे जबरदस्ती अपनी हवस का शिकार बनाया था। वापस लौटने पर किशोरी ने आरोपी की हरकत की जानकारी अपनी मौसी को दी थी।’
महिला की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी दिनेश चंद्र मिश्रा के खिलाफ पॉक्सो और एससी एसटी एक्ट में एफआईआर दर्ज कर ली और अगले दिन यानी १९ सितंबर को उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। विवेचना के बाद १८ नवंबर २०२१ को विशेष कोर्ट में आरोपी के खिलाफ पॉक्सो और एससी / एसटी एक्ट में चार्जशीट दायर की गई। विशेष कोर्ट ने दस तारीखों में १४ गवाहों के बयान दर्ज किए थे। एक तारीख पर अभियुक्त के बयान और एक तारीख पर केस की बहस हुई थी और इस तरह १२ तारीखों में पीड़िता को न्याय देते हुए पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को उम्रवैâद की सजा सुना दी।





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