मुंबई, कुर्ला और कालबादेवी में इमारत हादसों के बाद पुरानी और जर्जर इमारतों का मसला फिर सुर्खियों में आ गया है। मुंबई में अभी भी १८७ निजी इमारतें खतरनाक अवस्था में हैं, जिसमें सैकड़ों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं। शहर में कुल ३३७ निजी इमारतें खतरनाक अवस्था में थीं, जिसमें से २९ इमारतों को जमींदोज करने में मुंबई मनपा को सफलता मिली है। इनमें अभी भी ३०८ खतरनाक इमारतें खड़ी हैं।
मुंबई मनपा ने हर साल की तरह इस बार भी मानसून से पहले मुंबई कि धोखादायक इमारतों का सर्वेक्षण किया था। इस सर्वे में ३३७ इमारतें धोखादायक पाई गर्इं। सी- वन यानी अति खतरनाक इमारतों को गिराना जरूरी होता है। पिछले वर्ष मुंबई में ४६२ इमारतें खतरनाक पाई गई थीं। अब तक १३६ इमारतों को गिराने में मुंबई मनपा को सफलता मिली है। मनपा की नीति के अनुसार ३० साल पुरानी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट किया जाता है। इनमें जो इमारतें खतरनाक अवस्था में पाई जाती हैं, उन्हें खाली करने के लिए ३५४ की नोटिस दी जाती है। इस साल भी सर्वेक्षण करके खतरनाक इमारतों में रहनेवालों को घर खाली करने की नोटिस दी गई है। हालांकि कुछ इमारतों के निवासी आपत्ति जताते हुए कोर्ट की शरण लेते हैं। कुछ पालिका के तकनीकी सलाहकार समिति से गुहार लगाते हैं। इसकी वजह से इमारत उसी अवस्था में रह जाती है। किसी इमारत के संबंध में कोर्ट द्वारा स्थगन आदेश दिए जाने के बाद वह इमारत गिराई नहीं जा सकती। कानूनी पेंच में फंसी तकरीबन १३२ इमारतें खतरनाक अवस्था में खड़ी हैं।





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