मुंबई, मनपा द्वारा संचालित घाटकोपर के राजावाड़ी अस्पताल में दुर्लभ रोग से पीड़ित एक आठ महीने के बालक की आंखों की सफलतापूर्वक सर्जरी की गई। बताया गया है कि राजावाड़ी अस्पताल के डॉक्टरों ने इस तरह की सर्जरी पहली बार की है। बता दें कि इस विशेष सर्जरी के लिए बालक को एक बड़े अस्पताल से राजावाड़ी में भेजा गया था।
जन्मजात ग्लूकोमा कमजोर उत्सर्जन वाहिनी के कारण होता है। इसमें आंख के आगे का हिस्सा बड़ा और दूधिया हो जाता है। जिससे आंख में नीलापन आ जाता है। ऐसी स्थिति पैदा होने के पीछे कई कारण होते हैं। उनमें से एक आंख असामान्य रूप से विकसित होती है। यदि तीन से चार साल की उम्र के बाद ग्लूकोमा दिखाई देता है तो इसे चाइल्ड ग्लूकोमा कहा जाता है।
कुछ दिन पहले जलगांव के आठ माह के बच्चे को इलाज और सर्जरी के लिए राजावाड़ी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बच्चे की दाहिनी आंख में समस्या थी, जो सामान्य आकार से बड़ी थी। यह समस्या उसके जन्म के दो से तीन महीने के बाद शुरू हुई। जांच करने पर उसकी आंख में कॉर्निया डायमीटर मिला। बच्चे की जांच करने वाले वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञों ने उसे मुंबई के राजावाड़ी अस्पताल में ले जाने की सलाह दी।
इन मामलों में सर्जरी सबसे अच्छा इलाज है। यदि सर्जरी जल्द से जल्द की जाती है, तो सफलता दर ९० फीसदी है। अस्पताल के चिकित्सकों ने कहा कि बच्चे की यह सर्जरी मुश्किल होने के साथ ही एनेस्थीसिया विभाग के लिए भी चुनौती थी। हालांकि छह से अधिक चिकित्सकों की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया। राजावाड़ी अस्पताल की वरिष्ठ नेत्र रोग व ग्लूकोमा विशेषज्ञ डॉ. सारिका शिंदे के अनुसार ऐसी स्थिति वाले बच्चों में ग्लूकोमा की सर्जरी जरूरी है। कई बार सर्जरी को दोहराना पड़ता है। सभी सर्जरी का उद्देश्य आंतरिक दबाव को कम करना है।





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