Home Crime ईंधनों की वजह से समुद्रों में प्रदूषण, वैज्ञानिकों ने जताई चिंता

ईंधनों की वजह से समुद्रों में प्रदूषण, वैज्ञानिकों ने जताई चिंता

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1002940646 Aryfahmed/Getty Images

मुंबई, परमाणु ऊर्जा विकसित करनेवाले कई देश रेडियोएक्टिव वेस्ट आर्कटिक में डालते रहे हैं। सोवियत यूनियन ने भी १९५७ और १९८९ में ऐसा किया था। पर्यावरण से संबंधित जोखिम के आकलन को लेकर रूस के रुख और सामानों के ढेर को लेकर अतीत में किए गए फैसलों को लेकर अब उत्तरी समुद्री मार्ग का ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। इसकी वजह से आज के समय में सबसे अहम मुद्दा परमाणु पनडुब्बियों में इजाफा है, जिसके रिएक्टर्स में इस्तेमाल में लाए गए परमाणु ईंधन होते हैं। इन ईंधनों की वजह से समुद्रों में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है, जिसे लेकर वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है। मरमंस्क में हाल ही में ‘रेजिंग सबमज्र्ड एंड डेंजरस ऑब्जेक्ट्स इन द सीज ऑफ द आर्कटिक ओसिएन (आर्कटिक महासागर के समुद्रों में जलमग्न एवं खतरनाक वस्तुओं के बढ़ते स्तर)’ पर एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। जिसमें ये चिंता वैज्ञानिकों ने जताई है। सीनियर आर्कटिक ऑफिशियल्स के चेयरपर्सन और रूस के विदेश मंत्रालय के तहत काम करने वाले आर्कटिक को-ऑपरेशन के एंबेस्डर-ऐट-लार्ज निकोलेय ने कहा, ‘पर्यावरण को होनेवाले समूचे नुकसान को खत्म करना हमेशा से हमारी प्राथमिकता रही है और इनमें बढ़ते रेडियोएक्टिव एवं खतरनाक वस्तुओं का खात्मा करना शामिल रहा है। हर गुजरते साल के साथ यह मुद्दा और अहम बनता जा रहा है क्योंकि रूसी फेडरेशन के तहत आनेवाले आर्कटिक जोन का आर्थिक विकास जारी है इनमें नॉर्दर्न सी रूट शामिल है, जिसका सामानों की शिपिंग के लिए इस्तेमाल बढ़ने ही वाला है।