मुंबई:-मनोज दुबे
भ्रष्टाचार में लिप्त पुलिस अधिकारी लगातार अपनी मनमानी कर रहे हैं अपनी वर्दी का दुरुपयोग करके समाज सेवक, पत्रकार, पॉलीटिशियन जैसे सामाजिक व्यक्तियों पर लगातार फ़र्ज़ी मुकदमे दर्ज कर रहे है। बिना किसी डर और ख़ौफ़ के साथ पुलिस स्टेशन में आए व्यक्ति के साथ जबरन वसूली कर रहे हैं ऐसे पुलिस कर्मियों की वजह से ईमानदार पुलिस वालों की छवि खराब होती जा रही है। ऐसे अधिकारीयो की वजह से मुंबई पुलिस की प्रतिमा लगातार कलंकित होती जा रही है।
महाराष्ट्र पुलिस के स्लोगन सद्रक्षणाय खलनिग्रहणाय का अर्थ होता है “सच्चे लोगों की रक्षा के लिए और दुष्टों पर नियंत्रण के लिए” पुलिस हमेशा आप की सेवा में हाजिर है।
लेकिन वही साकीनाका के पुलिस उपनिरीक्षक प्रवीण गभाले ने इस स्लोगन को ही बदल दिया है।
साकीनाका में रहने वाले समाज सेवक चंदमोहन तिवारी को रात के वक्त कुछ नवजवान लड़को का फ़ोन आया और उन्होंने उनसे सहायता मांगी समाज सेवक होने के नाते वो तुंरत पोलिस थाने पहुँचकर दोनों नवजवान युवकों के बीच समझा बुझाकर कर मामले को निपटाने का काम किया।
इस देखकर पुलिस उपनिरीक्षक प्रवीण गभाले आग बबूला हो गया और तिवारी को जातिवाचक गालियां देने लगा उसके बाद तिवारी की बेरहमी से बेल्ट से पिटाई की तिवारी को इतना प्रताड़ित किया गया कि वह रोने लगा।
तिवारी ने प्रवीण गभाले की गुंडागर्दी के खिलाफ अपर पुलिस आयुक्त पश्चिम प्रादेशिक विभाग को लिखित शिकायत करके इंसाफ की मांग की है वही कुछ पुलिस कर्मी तिवारी को फ़ोन करके मिलकर समझौता करने का दबाव डाल रहे है।
तिवारी ने अपनी शिकायत मानवाधिकार आयोग और पुलिस तक्रार प्राधिकरण को देने की इच्छा बताई है।अब देखना है कि प्रवीण गभाले जैसे पुलिस कर्मियों पे साकीनाका पुलिस मामला दर्ज करती है या उसे बचाने का प्रयत्न करती है।





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