मुंबई, राज्य की असंवैधानिक शिंदे-फडणवीस यानी ‘ईडी’ सरकार का भविष्य तय करने का मामला संवैधानिक खंडपीठ के पास चला गया है, वहां क्या होगा, यह आने वाले दिनों में दिखेगा, लेकिन असंवैधानिक तरीके से सत्ता पर आई ‘ईडी’ सरकार को मान्यता मिलती है तो देश में लोकतंत्र बचेगा ही नहीं, ऐसा डर प्रतिपक्ष के नेता अजीत पवार ने व्यक्त किया है। इसके साथ ही १४५ विधायकों का समर्थन है तब तक सरकार रहेगी वर्ना गिर जाएगी, ऐसी भावना भी उन्होंने व्यक्त की। बहुमत वाली विरोधी दल की सरकार गिराने का जो सिलसिला चल रहा है, यह लोकतंत्र के लिए घातक है, ऐसा भी उन्होंने कहा। पश्चिम बंगाल व राजस्थान में भी प्रयत्न किए गए, परंतु वहां सफलता नहीं मिली। बिहार में नीतीश कुमार ने जोरदार झटका दिया। उन्होंने कहा कि ‘ईडी’ सरकार को किसानों की समस्या से कोई लेना देना नहीं है। राज्य में ‘ईडी’ सरकार के शपथ लेने के बाद से अब तक तकरीबन १३७ किसानों ने आत्महत्या की है। इन किसानों की विधवा पत्नियों का क्या करना है? किसानों को यह अपनी सरकार है, ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर हमला करते हुए कहा कि तत्कालीन नगर विकास मंत्री और वर्तमान में मुख्यमंत्री शिंदे ने जिन विकास कार्यों के संदर्भ में निर्णय लिया था, उसी काम को स्थगन दे रहे हैं, इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है?





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