मुंबई, कोयला आयात में भाजपा की सरपरस्त बिजली कंपनियों का कब्जा हो गया है। आरोप है कि विदेश से कोयला मंगाने के नाम पर देश के तकरीबन पांच बड़े कोयला व्यापारी इस सरपरस्ती में अरबों-खरबों रुपए का खेल-खेल रहे हैं। ऐसे में बिजली उत्पादन के हालात कैसे सुधरें? इस पर बिजली मामलों के जानकारों ने कई सवाल उठाए हैं। प्रमुख रूप से हिंदुस्थान में कोयले का आयात साउथ अफ्रीका , ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया इन ३ देशों की खदानों से होता है। अदाणी इंटरप्राइजेज की ऑस्ट्रेलिया में खुद की खदानें हैं। ऑस्ट्रेलिया से ७० से ८० फीसदी कोयले का आयात खुद के पावर स्टेशनों के लिए करती है। टाटा पावर की भी विदेश में खदानें हैं। इस बीच अदाणी इंटरप्राइजेज, अग्रवाल कोल कॉरपोरेशन लिमिटेड, आदि ट्रेडलिंक, चेत्तीनाड लॉजिस्टिक और मोहित मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किए जा रहे कोयला आयात को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि ये भारतीय कंपनियां सरकार को विदेश से कोयला मंगवाकर चार से पांच गुना महंगे दामों में बेचती हैं।
देश की दो प्रमुख कंपनियां एनटीपीसी और कोल इंडिया लिमिटेड विदेशों से कोयला मंगाने या आयात करने के नाम पर टेंडर जारी करती हैं। सवाल उठाए गए हैं कि कैसे संभव है कि शत-प्रतिशत टेंडर इन्हीं पांच कंपनियों को कैसे मिलते हैं? विदेशों में अपनी कंपनियों के ऑफिस खोलकर और उन्हें वहां पर रजिस्टर्ड कराकर सस्ता कोयला खरीदकर अत्यधिक महंगे दामों पर भारत सरकार और राज्य सरकारों को बेच रहे हैं। आम उपभोक्ता महंगी बिजली खरीदने को मजबूर हैं। आरोप है कि देश की मुद्रा को भी देश से बाहर अपनी कंपनियों में भेज रहे हैं।
बिजली मामलों के जानकार और महाराष्ट्र राज्य बिजली उपभोक्ता संगठन के अध्यक्ष प्रताप होगाड़े के अनुसार वे अदाणी इंटरप्राइजेज के २२ हजार करोड़ रुपए का मामला उठा चुके हैं। विदेश से आयातित होनेवाले कोयले में कितने बिचौलिए संलग्न हैं, इसकी पर्याप्त जानकारी उनके पास उपलब्ध नहीं है लेकिन यह सत्य है कि कोयले आपूर्ति में बड़ा खेल होता है, जो सतत जारी है। यह बिजली उत्पादन को प्रभावित कर रहा है। बिजली मामलों के जानकार अनिल बचाके बताते हैं कि कोयला आयात में कई ट्रेडर्स बिचौलिए के तौर पर हावी हैं। विदेश से कोयला खरीदकर ये पिछले कुछ वर्षों में अमीरों की सूची में शामिल हुए हैं।





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