मुंबई, प्रसिद्ध पत्रिका लैंसेट में प्रकाशित अध्ययन का निष्कर्ष है कि धूम्रपान करनेवालों के करीबवालों को कैंसर होने का ज्यादा खतरा होता है। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जो लोग धूम्रपान करते हैं उनकी सेहत कैसी होगी? डॉक्टरों के अनुसार सिगरेट या बीड़ी पीनेवाले को नुकसान होता ही है। उसके आसपास रहनेवाले लोगों को उसका धुआं नुकसान पहुंचाता है। वह भी उसके शरीर में जाकर फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। तंबाकू का सबसे पहला असर हृदय पर पड़ता है, फिर फेफड़ों पर पड़ता है।
आज की युवा पीढ़ी स्टेटस सिंबल मानकर धूम्रपान की गलत आदत के दलदल में फंसती जा रही है। उसे नहीं पता कि धूम्रपान करना एक मीठा जहर है, जो जिंदगी के लिए हर तरह से खतरनाक है। साइलेंट किलर की तरह धूम्रपान शरीर को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाता है। इससे ओरल कैंसर और लंग्स कैंसर के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं।
धूम्रपान की वजह से दांतों से संबंधित बीमारियां भी होती हैं। इससे हार्ट की बीमारी, क्रोनिक लंग्स डिजीज और डायबिटीज का खतरा रहता है। इससे अस्थमा अटैक भी आ सकता है। महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी धूम्रपान का गंभीर असर पड़ रहा है। इससे पर्यावरण को भी खतरा हो रहा है।
भारत वैश्विक स्तर पर तंबाकू उत्पादों का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और तंबाकू से संबंधित बीमारी के कारण प्रतिवर्ष दस लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। भारी-भरकम कर लगाए जाने, कड़ी चेतावनीवाले लेबल लगाए जाने के बावजूद तंबाकू के उपयोग में गिरावट नहीं देखी जा रही है। भारत में १६ साल से कम उम्र के २४ फीसदी बच्चों ने पिछले कुछ समय में तंबाकू का इस्तेमाल किया है और १४ फीसदी लोग अभी भी तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल कर रहे हैं।





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