मुंबई, मुंबई में हवा की गुणवत्ता दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। मुंबई के लोगों को प्रदूषण के रूप में स्लो पॉइजन मिल रहा है। विपक्ष मुंबई में प्रदूषण की समस्या को लेकर रोज सरकार से सवाल कर रहा है, लेकिन मनपा प्रशासक हैं कि हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और जो कर रहे हैं, उसका कोई परिणाम नहीं दिख रहा है। ऐसे में विपक्ष ने राज्य सरकार पर जानबूझकर मुंबई की हवा खराब करने का आरोप लगाते हुए मुंबईकरों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने के लिए जिम्मेदार बताया है। सरकार से मांग की है कि यदि सरकार मुंबई में प्रदूषण की बीमारी को रोकने में असफल है तो इसे मेडिकल इमरजेंसी क्यों नहीं घोषित कर देती है?
इस बारे में मनपा में पूर्व विपक्ष नेता रहे रवि राजा ने सरकार को पत्र लिखा है कि खराब प्रदूषण से मुंबईकरों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है और उन्हें कई तरह की बीमारियां घेर रही हैं, ऐसे में सरकार को मुंबई में मेडिकल इमरजेंसी घोषित कर देना चाहिए, ताकि वे खुद ही इनसे लड़ सकें। रवि राजा ने इस बारे में जानकारी सोशल मीडिया पर पोस्ट भी की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार मुंबई की आबो-हवा के लिए अच्छे पैâसले लेती है तो पूरा विपक्ष उसके साथ खड़ा होगा, लेकिन इस घाती सरकार में कुछ करने की इच्छाशक्ति ही नहीं है। इसकी ही देन है कि मुंबई की अबो-हवा बद से बदतर होती जा रही है। विश्व के सातवां नंबर पर प्रदूषित शहर मुंबई है। अब मुंबई हाई कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया है और केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकार और मनपा को कटघरे में खड़ा किया है। मुंबई हाई कोर्ट ने कहा कि मुंबई में बढ़ता प्रदूषण बेहद चिंताजनक है। मुख्य न्यायाधीश ने बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर चिंता जताते हुए सुमोटो याचिका भी दायर की।





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