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आरक्षण के लिए राज्य सरकार को २४ घंटे का अल्टीमेटम

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मुंबई, राज्य मंत्रिमंडल द्वारा लिया गया एक भी निर्णय मुझे मान्य नहीं है। पिछले सात दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे मनोज जरांगे पाटील ने आरक्षण के लिए राज्य सरकार को २४ घंटे का अल्टीमेटम दिया है। हिंसक प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हत्या के प्रयास की धारा ३०७ के तहत मामला दर्ज करने के गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आदेश के बाद जरांगे भड़क गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए तो वह सड़क पर उतरेंगे। इस बीच महाराष्ट्र मराठा आंदोलन की आग में सुलग रहा है। नांदेड़-हैदराबाद मार्ग पर आज ‘रास्ता रोको’ ने हिंसक रूप ले लिया। पुलिस के लाठीचार्ज करते ही भीड़ ने पथराव कर दिया। पुलिस अधीक्षक घायल हो गए हैं। धाराशिव जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया है और जालना में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। बीड़ में आज तनावपूर्ण सन्नाटा था। राज्य में विभिन्न स्थानों पर बंद देखा गया, जबकि सोलापुर में गुस्साई भीड़ ने कलेक्टर कार्यालय पर ताला लगा दिया है।
बीड में हिंसक भीड़ द्वारा दो विधायकों के घर जलाए जाने और कई जगहों पर दफ्तरों में तोड़फोड़ के बाद सरकार को झटका लगा है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के ठाणे स्थित आवास की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। राज्य सरकार के मंत्रियों, विधायकों और सांसदों के घरों पर भी पुलिस निगरानी रख रही है।
मराठा आरक्षण के लिए कल पांच और आत्महत्याएं हुर्इं। गंगाखेड के मैरल सावंगी में एक युवक अशोक रंगनाथ जाधव ने नदी में कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। सोपान बाबूराव कचारे ने जालना के कचारेवाड़ी में एक कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली, जबकि छत्रपति संभाजीनगर शहर में एक युवक शुभम अशोक गाडेकर ने मरने की कोशिश की। संगमनेर में सागर भाऊसाहेब वाले और पंढरपुर में विलास किसान क्षीरसागर ने मराठा आरक्षण के लिए फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सरकार के विरोध में अब तक २० से ज्यादा लोग आत्महत्या कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे, उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, मंत्री छगन भुजबल, नारायण राणे, बदनापुर के विधायक नारायण कुचे, एड. गुनरत्न सदावर्ते आदि के फोटो लगाकर गुस्साए मराठा प्रदर्शनकारियों ने बदनापुर तालुका के गेवराई बाजार में प्रतीकात्मक शवयात्रा निकाली। जालना जिले के अनेक गांवों में कल मराठा समाज की ओर से बंद रखा गया था।