मुंबई। महाराष्ट्रत के किसानों को एक तरफ प्याज, सोयाबीन और कपास जैसे फसलों का दाम नहीं मिल रहा है तो दूसरी ओर बारिश की वजह से बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा पांच महीने के बाद भी नहीं मिल सका है. इससे किसानों में गुस्सा है. उनका कहना है कि वो आर्थिक संकट में कैसे आगे खेती करेंगे. अगस्त 2023 में महाराष्ट्र में हुई मूसलाधार बारिश के बाद सबसे ज्यादा खरीफ फसलें प्रभावित हुई थीं. इसके बाद प्रदेश के 50 लाख से अधिक किसानों को प्रधानमंत्री खरीफ फसल बीमा योजना के तहत 25 प्रतिशत मुआवजा दिया गया था. यह रकम लगभग 2200 करोड़ रुपये थी. यह मुआवजे का अग्रिम भुगतान था. लेकिन पांच माह बीतने के बाद भी केंद्र सरकार द्वारा नीति तय नहीं करने की वजह से शेष 75 फीसदी मुआवजे की रकम नहीं मिल पाई है. जिससे किसान आर्थिक संकट में हैं.
अतिवृष्टि की वजह से इस साल बड़े पैमाने पर फसलों को नुकसान पहुंचा था. फसल बीमा योजना के प्रावधानों के अनुसार 21 दिन से अधिक समय तक फसल खराब होने तथा उत्पादन में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट होने पर मुआवजा दिया जाता है. इसके मुताबिक राज्य के 24 जिलों के 50 लाख 94 हजार 467 किसानों को 25 फीसदी अग्रिम रकम देने की घोषणा की गई थी. इसके तहत प्रभावित किसानों में 2006 करोड़ रुपये की रकम बांटी गई थी. लेकिन बाकी पैसे का किसान अब तक इंतजार ही कर रहे हैं.





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