मुंबई: एनसीपी के संस्थापक शरद पवार चुनावी रैलियां कर रहे हैं. उनकी पार्टी महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी का हिस्सा है. मुकाबला बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति से है. इस बीच शिरूर और अहमदनगर लोकसभा क्षेत्रों में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) उम्मीदवारों के लिए चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए सोमवार (30 अप्रैल) को उन्होंने कहा कि उन्होंने पिछले कुछ हफ्तों में पूरे महाराष्ट्र में प्रचार करते हुए हजारों लोगों से बातचीत की और बदलाव की उनकी इच्छा को महसूस किया.
शरद पवार ने सोमवार को कहा कि पूरे देश में बदलाव की हवा चल रही है. अपनी खामियों और विफलताओं के कारण सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रति अब लोगों की धारणा बदल गई है. उन्होंने कहा, “जनता, किसान, श्रमिक, युवा और महिलाएं बीजेपी सरकार की कार्यशैली से परेशान हैं. बीजेपी को 10 साल तक देश पर शासन करने का अवसर मिला, लेकिन उन्होंने जनता को निराश किया.” उन्होंने दावा किया कि विभिन्न क्षेत्रों में संकट के अलावा बीआर आंबेडकर द्वारा लिखित संविधान पर भी खतरा मंडराने लगा है.
पवार ने कहा,“हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसा नहीं मानते हैं. वे अपने भाषणों में जवाहरलाल नेहरू, अन्य पूर्व प्रधानमंत्रियों और हमारी भी आलोचना करते रहते हैं. पवार ने कहा, प्रधानमंत्री को हम (विपक्ष) को निशाना बनाए बिना रात में नींद नहीं आती है. उन्हें काम के माध्यम से अपने पद की गरिमा बरकरार रखनी चाहिए.”
वरिष्ठ नेता ने कहा, वर्तमान सरकार संसदीय लोकतांत्रिक प्रणाली या विपक्ष में विश्वास नहीं करती है. राष्ट्रीय समस्याओं को हल करने के लिए सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंधों पर उसे विश्वास नहीं है.
पवार ने कहा, “जब मैं लोकसभा में विपक्ष का नेता था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और उनके वरिष्ठ मंत्री अक्सर मेरे साथ बैठते थे और मुद्दों पर चर्चा करते थे. वे हमारी राय पूछते थे और अगर उन्हें लगता था कि हम सही हैं, तो वे उन्हें लागू करने का आश्वासन देते थे.”
उन्होंने चेतावनी दी, “वर्तमान सरकार संविधान को बदलना चाहती है. उनके नेता सार्वजनिक रूप से यह कह रहे हैं. उन्होंने इतने सालों तक यहां स्थानीय चुनाव कराने की जहमत नहीं उठाई, वे नहीं चाहते कि लोगों को वोट देने का अधिकार मिले. उनके फैसले संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार को छीनने की कोशिश कर रहे हैं.”
रैलियों में कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के अन्य एमवीए नेताओं के साथ बड़े पैमाने पर ग्रामीणों और किसानों को संबोधित करते हुए पवार ने कहा, “जिन लोगों के हाथों में आज महाराष्ट्र है, उन्हें जनता से जुड़े मुद्दों में कोई दिलचस्पी नहीं है.”





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