मुंबई : ईमानदारी की शपथ लेकर सरकारी सेवा में आने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के वादे कितने सच्चे होते हैं, इसका खुलासा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज किए गए मामले देखने से होता है। एसीबी के आंकड़ों से पता चला है कि रिश्वतखोरी के मामले में पहले स्थान पर राजस्व और भूमि अभिलेख विभाग के अधिकारी और कर्मचारी हैं, जबकि पुलिस महकमा दूसरे नंबर पर है। महाराष्ट्र भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले 8 महीने में भ्रष्टाचार के 499 मामले दर्ज हैं, जबकि 472 ट्रैप लगाए गए हैं। जांच और तलाशी के दौरान आरोपियों से रिश्वत की 1.49 करोड़ रकम जब्त की गई है। घूसखोरी के मामले में राजस्व विभाग के बाद पुलिस विभाग, पंचायत समिति और जिला परिषद का स्थान है।
केस- घूस की रकम टॉइलेट में बहा दी
एसीबी ने अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी प्रल्हाद शितोले (43) को कथित तौर पर 60 हजार रुपये की रिश्वत को स्वीकार करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। बोरीवली के एक होटल में पीएनजी कनेक्शन के लिए एनओसी जारी करने की एवज में यह घूस मांगी गई थी। शिकायतकर्ता संपर्क अधिकारी हैं, जिन्होंने शितोले से संपर्क किया था। हालांकि, दहिसर स्थित कार्यालय की लिफ्ट में शितोले जब घूस की रकम 60 हजार रुपये ले रहा था, तो उसे शक हो गया और उसने रकम लेकर घर के टॉयलेट में फेंक दिया और फ्लश कर दिया, लेकिन एसीबी अधिकारियों ने दो प्लंबर्स की मदद से ड्रेनेज चेंबर में से 57 हजार रुपये जब्त करने के बाद शितोले को अरेस्ट कर लिया।





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