Home Maharashtra जिन वजहों से जाने जाते थे राज ठाकरे, वे हुए अप्रासंगिक

जिन वजहों से जाने जाते थे राज ठाकरे, वे हुए अप्रासंगिक

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मुंबई: इस चुनाव में राज ठाकरे महाराष्‍ट्र की राजनीति में परिवारवाद को बढ़ावा देने वाले उन करीब चार दर्जन नेताओं में भी शामिल हैं जो अपने किसी करीबी रिश्‍तेदार को इस बार विधायक बनवाकर उनका चुनावी सफर शुरू करवाना चाह रहे हैं. महाराष्‍ट्र की राजनीतिक लड़ाई दो गुटों में बंटे छह राजनीतिक दलों के बीच है. इनमें से सभी ने किसी न किसी नेता के करीबी रिश्‍तेदार को पहली बार चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया है. भाजपा, कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) के कम से कम नौ-नौ ऐसे उम्‍मीदवार हैं. शिंदे सेना ने आठ, उद्धव सेना ने पांच और एनसीपी (अजीत पवार) ने कम से कम एक ऐसा उम्‍मीदवार उतारा है.
शिवसेना से जुदा होकर राज ठाकरे ने 2006 में महाराष्‍ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) बनाई और अपनी अलग राजनीतिक राह पकड़ी. लेकिन, वह बहुत आगे चल नहीं सके. उन्‍होंने 2009 में जरूर विधानसभा में 13 सीटें जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन उनकी पार्टी का वह पहला और आखिरी उल्‍लेखनीय प्रदर्शन रहा. 2009 में एमएनएस का वोट प्रतिशत 5.75 था, जो 2019 में 2.25 रह गया.
2019 के विधानसभा चुनाव में राज ठाकरे का केवल एक विधायक ही चुनाव जीत सका था. इसके बावजूद 2024 में उन्‍होंने सौ से ज्‍यादा उम्‍मीदवार उतारे हैं. इनमें से एक उनका बेटा अमित ठाकरे भी है.
इस बीच, राज ठाकरे ने अपना चरित्र भी पूरी तरह बदल लिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कटु आलोचक से उनके प्रशंसक और भाजपा समर्थक बन गए. 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्‍होंने अपना उम्‍मीदवार नहीं उतारा था. वह कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के समर्थन में थे. इस गठबंधन के लिए की जाने वाली रैलियों में वह जम कर नरेंद्र मोदी और भाजपा की आलोचना करते थे. यह बात अलग है कि जिन दस लोकसभा क्षेत्रों में उन्‍होंने रैलियां कीं, उनमें से नौ में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की हार हुई.
2024 आने से पहले ही राज ठाकरे ने अपना स्‍टैंड बदल लिया. इस चुनाव में वह भाजपा के लिए बैटिंग कर रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच भी साझा कर चुके हैं. अब वह यह तक कह रहे हैं कि शिवसेना को छोड़ कर बीजेपी ही एक मात्र पार्टी है, जिसके साथ मेरे संबंध हैं. भाजपा के देवेंद्र फडणवीस भी उन्‍हें दोस्‍त बता रहे हैं.
विधानसभा चुनाव में करीब 70 सीटों पर बीजेपी के साथ उनका दोस्‍ताना मुकाबला है. माहिम से राज ठाकरे ने अपने बेटे के लिए भी बीजेपी और एनडीए का समर्थन हासिल कर लिया है.