नालासोपारा : पालघर जिले की सबसे हॉट सीट मानी जाने वाली नालासोपारा विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला काफी रोचक होगा। किस पार्टी की दावेदारी मजबूत रहेगी, यह तो चुनाव परिणाम के बाद ही पता चलेगा। फिलहाल महायुति व बहुजन विकास आघाडी (बविआ) के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है। महाआघाडी व प्रहार जनशक्ति के उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में हैं, लेकिन असली मुकाबला महायुति व बविआ के बीच ही होगा। बविआ के क्षितिज ठाकुर तीन बार चुनाव जीतकर हैट्रिक लगा चुके हैं। हालांकि इस बार यह चुनाव उनके लिए आसान नहीं रहेगा।
उत्तर भारतीयों को साधने की कोशिश
नालासोपारा उत्तर भारतीयों का गढ़ माना जाता है, इसलिए इसे मिनी उत्तर प्रदेश भी कहा जाता है। यहां से महायुति के उम्मीदवार राजन नाईक के लिए डोर टू डोर प्रचार शुरू है। उत्तर भारतीय उम्मीदवारों को साधने के लिए बीजेपी ने गायक से सांसद बने मनोज तिवारी का रोड शो आयोजित किया। पार्टी के दिग्गज नेता भी रोड शो और सभाएं कर रहे हैं। वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह, उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सभाएं होने की संभावना है।
महिला वोटर्स की भूमिका बड़ी
पिछली बार यानी 2019 के चुनाव में महायुति के उम्मीदवार प्रदीप शर्मा को 46 हजार वोट से पराजित होना पड़ा था। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में महायुति के उम्मीदवार डॉ. हेमंत सावरा को 1 लाख 36 हजार वोट मिले थे। लोकसभा चुनाव के बाद नालासोपारा निर्वाचन क्षेत्र में 41 हजार मतदाता बढ़े हैं। इस विधानसभा में कुल मतदाताओं की संख्या 5,96,995 हो गई है। इसमें महिला मतदाताओं की संख्या 2,75,070 और पुरुष मतदाताओं की संख्या 3,21,807 है। यहां 121 थर्ड जेंडर मतदाता भी हैं। महिला वोटर्स इस बार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
पार्टियों के सामने अधूरे विकास से पार पाने की चुनौती
नालासोपारा शहर में कई बड़े मुद्दे हैं, जो कई साल से हल नहीं हुए हैं। यहां ट्रैफिक ज़ाम की समस्या गंभीर है। सड़कें भी खराब हैं, जिसकी वजह से लंबा ट्रैफिक ज़ाम लगता है। फेरीवालों की समस्या अब तक हल नहीं हो पाई है। मार्केट जोन नहीं होने से मजबूरन फेरीवाले सड़कों पर कब्जा किए बैठे हैं।
सबसे भीड़भाड़ वाले शहर नालासोपारा में ईस्ट से वेस्ट की ओर आने-जाने के लिए एकमात्र फ्लाईओवर है, जो काफी संकरा है। इस फ्लाईओवर पर हमेशा वाहनों की लंबी कतारें देखी जाती हैं। अलकापुरी व सेंट्रल पार्क का प्रस्तावित फ्लाईओवर भी नहीं बन पाए हैं। साथ ही अतिक्रमण किए जाने से सड़क पर पैदल चलना भी दूभर हो गया है। इसके अलावा, छह लाख वोटरों वाले इस विधानसभा क्षेत्र में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं वाला एक भी सरकारी अस्पताल नहीं है। हालांकि बविआ विकास के इन्हीं मुद्दे पर हमेशा से चुनाव लड़ती रही है।





Users Today : 52
Users Yesterday : 57
Users Last 7 days : 438
Users Last 30 days : 915
Users This Month : 399
Users This Year : 9349
Total Users : 70556
Views Today : 61
Views Yesterday : 81
Views Last 7 days : 600
Views Last 30 days : 1186
Views This Month : 545
Views This Year : 10582
Total views : 106605
Who's Online : 0


