मुंबई : शहर के सभी छोटे और बड़े नालों की सफाई का काम 25 मार्च से किया जाएगा। मानसून आने से पहले यानी 31 मई से पहले 75 प्रतिशत सफाई का काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस साल अगले दो वर्षों के लिए नाला सफाई कार्य के लिए कुल 26 निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। इसकी कुल लागत दो वर्षों में 580 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। इस वर्ष छोटी नालियों के लिए टेंडर प्रक्रिया जल्दी पूरी कर ली गई है।
प्रमुख नालों की सफाई प्रक्रिया में देरी के कारण कार्य आदेश जारी करने में विलंब हुआ है। मनपा अधिकारियों के अनुसार जल्द कार्य आदेश जारी कर दिए जाएंगे। नालों की सफाई पर ध्यान देने के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी औऱ ड्रोन से भी नजर रखने का विचार है। मीठी नदी की सफाई के लिए 35 मीटर लंबे बूम और 1.5 क्यूबिक मीटर क्षमता वाली पोकलेन मशीन तैनात करने की शर्त को निविदा में शामिल किया गया है। यह टेंडर प्रक्रिया अदालती पचड़े में फंस गई थी. अब इसे हरी झंडी मिल गई है और निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
मुंबई शहर के नालों की सफाई के लिए 39.45 करोड़ रुपए, पूर्वी उपनगर – 148.39 करोड़ रुपए और पश्चिमी उपनगर के लिए 257.35 करोड़ रुपए कर्च किए जाएंगे। मुंबई मनपा नाला सफाई का काम तीन चरणों में पूरा कराती है। मानसून से पहले 75 प्रतिशत, मानसून के दौरान 15 फीसदी और मानसून के बाद 10 प्रतिशत नाला सफाई का काम किया जाता है। इसमें सड़क किनारे नाले, छोटे-बड़े नाले, गटर और नदियों की सफाई शामिल है। मानसून के मौसम में जलभराव को रोकने के लिए हर साल मानसून से पहले कचरा निकालने का काम किया जाता है। मिट्टी, कीचड़ और कचरे के कारण अक्सर नालियां और नाले जाम हो जाते हैं। इसलिए बाढ़ की स्थिति से बचने के लिए मुंबई मनपा मानसून से पहले नालों की सफाई का काम करती है।





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