मुंबई: 2024 में भारत में कुल बिजली खपत का लगभग पांचवा हिस्सा यानी करीब 255 अरब यूनिट (किलोवॉट घंटा) कृषि क्षेत्र में उपयोग हुआ। इस मांग को केवल सौर ऊर्जा से पूरा करना एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य है, लेकिन अलग कृषि फीडर की मदद से यह काफी हद तक संभव हो सकता है। तमिलनाडु को छोड़कर देश के लगभग सभी राज्यों ने यह फीडर सेपरेशन का काम पूरा कर लिया है।
महाराष्ट्र का मॉडल
फीडर सेपरेशन के बाद अगला चरण है फीडर सोलराइजेशन। इसमें महाराष्ट्र ने 2022 से 2024 के बीच कई निर्णायक कदम उठाए हैं। राज्य सरकार ने लगभग 60 डेवलपर्स के साथ कुल 16 गीगावॉट सौर ऊर्जा क्षमता के लिए बिजली खरीद समझौते किए हैं। यह क्षमता राज्य की लगभग 90 फीसदी कृषि बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। वहीं, ऊर्जा टैरिफ 2.97 रुपये से 3.10 रुपये प्रति यूनिट तय हुआ है। यह दर अगले 25 सालों तक स्थिर रहेगी।
डेवलपर्स के लिए आकर्षक प्रोत्साहन
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, पुणे स्थित ऊर्जा थिंक टैंक प्रयास एनर्जी ग्रुप के संस्थापक सदस्य शांतनु दीक्षित महाराष्ट्र सरकार के साथ इस योजना पर कार्य कर चुके हैं। वे बताते हैं कि राज्य सरकार के प्रोत्साहनों के कारण डेवलपर्स ने बड़े पैमाने पर निवेश किया। इन प्रोत्साहनों में सौर परियोजनाओं के लिए 50,000 एकड़ भूमि की उपलब्धता, जिसमें सभी कानूनी मंजूरी शामिल थी, जल्दी काम शुरू करने वालों के लिए पहले तीन वर्षों तक 15–25 पैसे प्रति यूनिट अतिरिक्त प्रोत्साहन, स्थानीय ग्राम पंचायतों को तीन वर्षों तक सालाना ₹5 लाख की सहायता, ताकि वे स्थानीय अवसंरचना सुधार सकें, 700 करोड़ का घूर्णन कोष, जिससे समय पर भुगतान सुनिश्चित हो और डेवलपर्स को भुगतान में देरी न हो शामिल है।





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