मुंबई : सिटी सिविल कोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने वीणा नगर को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी लिमिटेड की याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका में सोसायटी ने निर्माण कंपनी – निर्माण कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और वीणा डेवलपर्स के खिलाफ कन्वेयनस की मांग की थी। वीणा नगर को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी लिमिटेड, मालाड (पश्चिम) में स्थित है। इसमें कुल पांच विंग, चार बंगलो और 12 दुकानें शामिल हैं। इसके अलावा यहाँ कई ऐसे फ्लैट भी हैं जिनमें अटैच टेरेस दी गई है। जानकारी के अनुसार, 1982 में फ्लैट खरीदारों को संपत्ति का कब्ज़ा सौंप दिया गया था, जबकि 1986 में फ्लैट मालिकों, दुकान मालिकों और बंगलो मालिकों ने मिलकर सोसायटी का गठन किया। सोसायटी का आरोप था कि बिल्डरों ने समय पर कन्वेयनस नहीं दिया, जिससे उन्हें कई कानूनी और प्रॉपर्टी से जुड़े अधिकार नहीं मिल पाए।
सोसायटी ने कोर्ट से अनुरोध किया था कि बिल्डरों को कन्वेयनस के लिए बाध्य किया जाए। लेकिन अदालत ने सोसायटी की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि मामला काफी देरी से दायर किया गया है। अदालत ने माना कि चूँकि सोसायटी का गठन 1986 में हुआ और कब्ज़ा 1982 में ही मिल चुका था, ऐसे में इस तरह का मुकदमा अब दाखिल करना विलंबित है। कानून के तहत समय सीमा का पालन करना अनिवार्य होता है, और इस मामले में सोसायटी ने समय रहते कदम नहीं उठाया।
सोसायटी की ओर से दलील दी गई थी कि फ्लैट मालिक और अन्य सदस्यों को बिल्डरों द्वारा अधिकारों से वंचित किया गया। उनका कहना था कि बिल्डरों को अब भी कन्वेयनस करना चाहिए, ताकि सोसायटी अपने नाम से जमीन और इमारत का पूर्ण स्वामित्व प्राप्त कर सके।सिटी सिविल कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को समय पर अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए थी। चूँकि यह मामला लंबे समय तक लंबित रहा और अब सामने आया है, इसलिए इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि “लंबे विलंब के बाद दायर मुकदमों में राहत नहीं दी जा सकती।”





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