नई दिल्ली : अरावली की पहाड़ियों के संरक्षण पर चल रहे विवाद के बीच इंडियन यूथ कांग्रेस ने 7 जनवरी से 20 जनवरी तक चार राज्यों में अरावली सत्याग्रह यात्रा निकालने की घोषणा की है। यह यात्रा गुजरात से शुरू होकर राजस्थान और हरियाणा होते हुए दिल्ली में समाप्त होगी। दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने यात्रा की घोषणा करते हुए केंद्र सरकार पर अरावली को कमजोर करने के गंभीर आरोप लगाए।
मोदी सरकार ने भंग की समिति
उदय भानु चिब ने कहा कि केंद्र सरकार ने खुद सुप्रीम कोर्ट को एक प्रस्ताव दिया है, जिसमें 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों को अरावली रेंज से बाहर करने की बात कही गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा करने का उद्देश्य इन क्षेत्रों में खनन का रास्ता खोलना है।
उन्होंने कहा कि पहले सुप्रीम कोर्ट की एक स्वतंत्र समिति सीईसी (सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी) अरावली क्षेत्र में खनन पर निगरानी रखती थी, लेकिन मोदी सरकार ने इस समिति को भंग कर दिया, क्योंकि यह एक न्यूट्रल कमेटी थी और उस पर सरकार का नियंत्रण नहीं था। इसके बाद पर्यावरण मंत्रालय, जो केंद्र सरकार के अधीन है, ने सुप्रीम कोर्ट को यह प्रस्ताव भेजा।
कॉरपोरेट हितों के लिए माइनिंग को बढ़ावा
यूथ कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाते हुए कहा कि असलियत में क्या हो रहा है, यह देश को जानना चाहिए। अरावली जैसी प्राचीन पर्वत श्रृंखला को कमजोर कर सरकार कॉरपोरेट हितों के लिए माइनिंग को बढ़ावा देना चाहती है। उन्होंने कहा कि अरावली सिर्फ एक पहाड़ी श्रृंखला नहीं बल्कि पर्यावरण संतुलन, जल संरक्षण और दिल्ली-एनसीआर की हवा के लिए जीवनरेखा है।





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