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बीजेपी महायुति की सत्ता की भूख लोकतंत्र के लिए खतरा – हर्षवर्धन सपकाल

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मुंबई : राज्य में लोकल बॉडी के चुनावों में फ्री और फेयर चुनाव की पॉलिसी हार गई है। मुख्यमंत्री और दोनों डिप्टी चीफ मिनिस्टर डेमोक्रेसी को लपेटकर पैसे से खेल रहे हैं। वोटिंग से पहले ही हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है, बीजेपी और महागठबंधन की सत्ता की भूख डेमोक्रेसी को निगलने के पॉइंट पर पहुंच गई है। ‘बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपैया’ का नारा नगर निगम चुनावों में जोरों पर चलाया जा रहा है, इसकी आलोचना हो रही है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने यह किया है।
तिलक भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव कोई नई बात नहीं है, एक हेल्दी डेमोक्रेसी में विपक्षी पार्टियां भी उतनी ही ज़रूरी हैं। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की कैबिनेट में छह नॉन-कांग्रेसी मंत्री थे, यह हमारी संस्कृति और परंपरा है, लेकिन विपक्ष न चाहने की आदत है। बीजेपी और महागठबंधन ने इसे बनाया है और रूलिंग पार्टी इसे बिना विरोध के करवाने के लिए किसी भी लेवल पर जा रही है।