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कुत्तों से होने वाली स्किन की बीमारियाँ इंसानों के लिए खतरनाक

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मुंबई : आवारा कुत्तों की संख्या काफी बढ़ गई है, जिससे बच्चों और बुज़ुर्गों समेत हज़ारों लोगों को परेशानी हो रही है। हर साल करीब दो हज़ार लोगों को कुत्ते काटते हैं। बच्चों की संख्या ज़्यादा है। पब्लिक जगहों पर आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या सिरदर्द बन गई है और अब यह चिंता भी है कि वे इंसानों में फैलने वाली बीमारियाँ फैला सकते हैं। खासकर, कुत्तों से होने वाली स्किन की बीमारियाँ इंसानों के लिए खतरनाक हैं।
आवारा कुत्तों में होने वाली अलग-अलग स्किन की बीमारियाँ
आवारा कुत्तों को मुख्य रूप से ‘सरकोप्टिक मैंज’ होता है, जिसे हम मोटे तौर पर ‘मैंज’ या ‘खुजली’ कहते हैं। यह माइट्स से होने वाली एक बहुत फैलने वाली बीमारी है। ‘फंगल इन्फेक्शन’ से स्किन पर गोल धब्बे पड़ जाते हैं। ‘बैक्टीरियल पायोडर्मा’ से घाव से मवाद निकलता है या स्किन लाल हो जाती है। ‘टिक फीवर’ और ‘एलर्जी’ स्किन की बीमारियाँ हैं जो टिक और पिस्सू के काटने से होती हैं।
लोगों को क्या खतरा है?
कुत्तों में होने वाली कुछ स्किन की बीमारियाँ ‘ज़ूनोटिक’ होती हैं, जिसका मतलब है कि वे जानवरों से इंसानों में आसानी से फैल जाती हैं। इनमें ‘स्केबीज़’ शामिल है, जिसमें कुत्तों पर लगे माइट्स के इंसानों की स्किन में घुसने पर बहुत ज़्यादा खुजली होती है। ‘रिंगवर्म’, जिससे शरीर पर लाल, खुजली वाले गोल धब्बे हो जाते हैं। ‘एलर्जिक डर्मेटाइटिस’, जिससे कुत्तों के संपर्क में आने पर रैशेज़ या स्किन सेंसिटिविटी हो जाती है।