मुंबई : होली का त्योहार चार मार्च को मनाया जाएगा। इसको अपने घरों में मनाने के लिए दूसरे शहरों व राज्यों में रहकर नौकरी व मजदूरी करने वाले लोगों का आना-जाना होगा। इसके लिए नौकरी पेशा व उच्च व मध्यम वर्ग के लोग ट्रेनों में आरक्षण कराने के लिए प्रयास कर रहे हैं। लेकिन पहले ही ट्रेनों में सीटें फुल हो चुकी हैं और लंबी वेटिंग चल रही है।
कई ट्रेनों में एक व दो मार्च को रिग्रेट दिखा रहा, यानि सीट उपलब्ध ही नहीं है। दिल्ली, मुंबई, पंजाब, उत्तराखंड में ऐसे बहुत से लोग रहते हैं जोकि जिले व प्रदेश से दूसरे शहरों व राज्यों में जाकर काम करके अपने जीवन-यापन कर रहे हैं। वह हर वर्ष होली-दीपावली जैसे त्योहारों पर अपने घरों आते हैं और पर्व मनाने के बाद वापस लौट जाते हैं।
जहां मजदूरी पेशा व्यक्ति ट्रेनों के सामान्य कोच में बैठकर ही अपनी यात्रा करते हैं, जबकि नौकरी पेशा आरक्षण करवा लेता है। दिल्ली, मुंबई, पंजाब से आने वाली ट्रेनों में सीटें नहीं है। लंबी वेटिंग और रिग्रेट की स्थिति बन गई है। सीट न मिलने से यात्रियों को वैकल्पिक साधन तलाशने पड़ रहे हैं, जिससे खर्च और परेशानी बढ़ रही है।
इन ट्रेनों में सीटें नहीं और लंबी वेटिंग
अवध असम एक्सप्रेस में बुकिंग की एक, दो व तीन फरवरी को सीटें ही नहीं है। आइआरसीटीसी और एनटीईएस रिग्रेट लिखा आ रहा है। सामान्य, स्लीपर, एसी सभी में सीटें फुल हैं। वापसी के लिए भी पांच फरवरी को 65 व छह में 53 वेटिंग है। इसी तरह से काशी विश्वनाा एक्सप्रेस में एक व दो फरवरी को रिग्रेट, तीन फरवरी को 101 वेटिंग तथा पांच व छह फरवरी 27 व 22 वेटिंग है।
श्रमजीवी एक्सप्रेस, सदभावना एक्सप्रेस, सत्याग्रह एक्सप्रेस, लखनऊ मेल में भी बुकिंग नहीं हो रही। 100 ऊपर तक वेटिंग है। पंजाब से आने वाली ट्रेनों में अमृतसर हावड़ा मेल में 53 तक वेटिंग है। शहीद एक्सप्रेस में 135, गंगा सतलुज एक्सप्रेस में 72 तक वेटिंग दिखा रहा है। उत्तराखंड में हरिद्वार से आने वाली ट्रेन दून एक्सप्रेस में 165, नौचंदी एक्सप्रेस में 73, गोरखपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस में 95 तक वेटिंग है।
अन्य विकल्पों का लेना पड़ेगा सहारा
रेल यात्रियों को मजबूरी में तत्काल टिकट का सहारा लेना पड़ता हैं। इससे ट्रेनों में भीड़ और बढ़ जाती है। इसके साथ ही तमाम यात्रियों को घर पहुंचने के लिए बस, फ्लाइट या निजी वाहन जैसे महंगे विकल्पों का चुनाव भी करना पड़ जाता है। यात्रियों की मांग है कि त्योहारों से पहले रेलवे को अतिरिक्त या स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की जाए। जिससे यात्रियों को कंफर्म सीट मिल सके।





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