मुंबई : एनजीओ डायरेक्टर और मीडिया प्रोफेशनल रवींद्र गणपत एरंडे (63) के खिलाफ यौन शोषण और एट्रोसिटीज एक्ट के तहत केस दर्ज होने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। यह मामला दर्ज किया गया। इससे पहले, दो दिन पहले ही एरंडे ने सतपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी कि चार लोगों ने उनसे ₹12 लाख की रंगदारी की मांग की थी। पुलिस ने इन चार आरोपियों को पहले ही अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था।
पुलिस और जांच सूत्रों के मुताबिक, एरंडे पर नौकरी का लालच देकर जरूरतमंद महिलाओं का यौन शोषण करने का आरोप है। शुरुआती जांच में शक जताया गया है कि उन्होंने नासिक और इगतपुरी के कुछ होटलों में महिलाओं का यौन शोषण किया और इस प्रक्रिया को छिप-छिपकर रिकॉर्ड किया। पीड़ितों में आंगनवाड़ी वर्कर, आशा वर्कर, फैक्ट्री कर्मचारी शामिल हैं। इस केस के तहत एरंडे के खिलाफ रेप और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस इस मामले की जांच में अन्य संभावित जगहों और लोगों के लिंक की भी डिटेल्ड पड़ताल कर रही है। सूत्रों का कहना है कि एरंडे का “ब्लू फिल्म” फॉर्मेट में वीडियो बेचने में शामिल होने का भी शक है, और इस दिशा में भी जांच की जा रही है।
स्थानीय समुदाय और पीड़ितों के परिजन इस मामले में चिंतित हैं। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी पारदर्शिता और सख्ती से होगी। पुलिस ने यह भी कहा कि जो भी लोग इस मामले में शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला नासिक में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों और यौन शोषण की समस्या पर भी नई बहस शुरू कर सकता है। साथ ही, यह घटना एनजीओ और मीडिया पेशेवरों में भरोसे को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि आरोपी खुद एक प्रतिष्ठित संस्थान से जुड़े थे।





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