मुंबई : हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस डबल डेक मालगाड़ी को हरी झंडी दिखाई, उसकी नींव 14 साल पहले पड़ चुकी थी। करीब एक दशक बीत जाने के बाद भी इस डेडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर का काम मालगाड़ियों की तरह धीमी रफ्तार से ही चल रहा था। आज हम जानेंगे वेस्टर्न डीएफसी के बारे में जिसे अगले साल तक जेएनपीटी (मुंबई) पहुंचना है।
देश के वेस्टर्न बंदरगाहों और व्यापार की दृष्टि से महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ने वाला वेस्टर्न डीएफसी कुल 1,504 किमी लंबा है। इस कॉरिडोर के चार हिस्से हैं। जिसमें खुर्जा से दादरी (46km), दादरी से रेवाड़ी (127km), मदार से पालनपुर (335km), पालनपुर से मकरपुरा (308km) और मकारपुरा से जेएनपीटी (430km) का हिस्सा है।
इनमें से खुर्जा से दादरी और मदार से पालनपुर अगले दो महीने में पूरी तरह से ऑपरेशनल होगा। इसके बाद दादरी से रेवाड़ी और पालनपुर से माकरपुरा अगले साल मार्च तक ऑपरेशनल होने की उम्मीद है। उम्मीद है कि ये कॉरिडोर अगले साल जून तक जेएनपीटी से भी कनेक्ट हो जाएगा।
एक जमाना था, जब जेएनपीटी पोर्ट से 30 प्रतिशत माल रेलवे द्वारा ढोया जाता था। वक्त के साथ भारतीय रेलवे में माल से होने वाली कमाई में गिरावट आई। आज जेएनपीटी की क्षमता दोगुनी होने के बावजूद रेलवे द्वारा केवल 18 फीसद माल ही उठाया जा रहा है। बाकी 82 फीसद माल रोड ट्रांसपोर्ट के जरिए पहुंचाया जाता है, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह से बदलने वाली है।
भारतीय रेलवे का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) देश में माल वहन का चेहरा बदल देगा। इस कॉरिडोर पर जब 100 किमी प्रतिघंटा (अधिकतम रफ़्तार) की गति से 1.5 किमी डबल डेकर मालगाड़ी फर्राटे से दौड़ेगी।
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के कार्यकाल में भारतीय रेलवे पर माल वहन के लिए अलग से कॉरिडोर बनाने की संकल्पना हुई थी। वर्ष 30 अक्टूबर, 2006 को कंपनीज ऐक्ट के तहत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (डीएफसीसीआई) का गठन हुआ। वर्ष 2007-12 की पंचवर्षीय योजना में इस परियोजना को शामिल किया गया।
इसके तहत वेस्टर्न डीएफसी और ईस्टर्न डीएफसी कुल 3,360 किमी लंबा फ्रेट कॉरिडोर (माल गाड़ियों के लिए अलग से ट्रैक) प्रस्तावित हुआ। ईस्टर्न डीएफसी लुधियाना (पंजाब) से दानकुनी (प.बंगाल) तक 1,760 किमी लंबा और वेस्टर्न डीएफसी महाराष्ट्र के जेएनपीटी से दादरी (उत्तर प्रदेश) तक कुल 1,504 किमी लंबा कॉरिडोर होगा।
डीएफसी बनने के साथ ही मुंबई से दिल्ली तक कुल 88 लेवल क्रॉसिंग बंद हो जाएंगी, जिसका लाभ मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों को भी मिलेगा। लेवल क्रॉसिंग बंद होने से मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की टाइमिंग भी बढ़ेगी। इसके अलावा यात्री ट्रेनें और मालगाड़ियां फिलहाल एक ही ट्रैक शेयर करती हैं, इससे यात्री ट्रेनों की गति में भी रुकावट होती है। डीएफसी बनने के बाद यात्री ट्रेनों की राह आसान हो जाएगी।
भारतीय रेलवे में अभी भी माल गाड़ियों के लिए समय सारिणी तो बनती है, लेकिन 90 प्रतिशत ट्रेनें तयशुदा वक्त पर नहीं चल पाती हैं। इन माल गाड़ियों को मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों के बीच-बीच में चलाकर किसी तरह चलाया जाता है।
मौजूदा स्थिति यह है कि मालगाड़ी 30-35 किमी प्रतिघंटे की औसत गति से चलती है। डीएफसी बनने के बाद 100 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से बिना रोक टोक मालगाड़ी गंतव्य स्थान तक पहुंच सकेगी। आज की परिस्थिति में जेएनपीटी से दादरी पहुंचने के लिए मालगाड़ी को 3 दिन लगते हैं, डीएफसी के बाद अधिकतम 24 घंटे में ट्रेनें पहुंच जाएंगी।





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