मुंबई : मर्दानगी यानी यौनशक्ति खोने के डर से दुनिया में लाखों पुरुष ग्रस्त रहते हैं। आंध्रप्रदेश के कुछ हिस्सों में पुरुषों में फैला ऐसा ही भ्रम दुनिया में सबसे शांत, संयमी एवं मेहनती माने-जानेवाले पशु गधे के अस्तित्व के लिए खतरा बनता जा रहा है। लोगों की सेक्स पॉवर बढ़ाने की सनक ने गधों की जान को खतरे में डाल दिया है। आलम ये है कि यहां के लोग सेक्स पॉवर बढ़ाने के लिए दूसरे राज्य से भी लाकर गधों को भी मार कर खा जा रहे हैं। यही कारण है कि यहां बकरे से भी महंगा गधे का मांस बिक रहा है।
बता दें कि भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसआई) ने गधे को फूड एनिमल के तौर पर रजिस्टर्ड नहीं करके यह संदेश दे दिया है कि इन्हें मारना अवैध है। इसके बावजूद आंध्रप्रदेश के अमरावती, गोदावरी, कृष्णा, प्रकाशम और गुंटूर सहित कई जिलों में लोग गधों का मांस धड़ल्ले से बेच और खा रहे हैं। यहां के लोगों में गधे के मांस को लेकर पैâला कुछ भ्रम इसकी वजह है। यहां के लोगों का मानना है कि गधे का मांस खाने से श्वास संबंधित परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है। उससे भी बड़ी बात ये है कि गधे का मांस खाने से पुरुषों में उत्तेजना और यौनशक्ति बढ़ती है। इसी वजह से आंध्र प्रदेश के कई जिलों में गधों को अंधाधुंध मारा जा रहा है। महंगा होने के बाद भी लोग गधे का मांस खा रहे हैं। यहां गधे का मांस ६०० रुपए प्रति किलो में बेचा जा रहा है। मांस बेचनेवाले व्यापारी एक गधा १५ से २० हजार रुपए में खरीदते हैं। एक अनुमान के अनुसार वर्ष २०१९ में आंध्रप्रदेश में सिर्फ ५,००० गधे शेष बचे थे। यहां के व्यापारी महाराष्ट्र व दूसरे पड़ोसी राज्यों से गधे लाकर यहां के लोगों को मांस उपलब्ध कराने की कोशिश करते रहे हैं। इसे रोकने के लिए महाराष्ट्र का एनिमल हज्बेंड्री डिपार्टमेंट सभी जिलाधिकारियों के नाम पहले ही सर्वुâलर जारी कर चुका है।.





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