मुंबई : पिछले सप्ताह मुकेश अंबानी की बिल्डिंग के बाहर एक आरोपी स्कॉर्पियो गाड़ी से आया। उसने उस गाड़ी को वहां छोड़ा, जिसमें 21 जिलेटिन की छड़ें थीं। साथ ही धमकी वाला पत्र भी। बाद में वह आरोपी पीछे खड़ी इनोवा कार में बैठकर चला गया। इस केस में जांच टीम को पता चला है कि मुकेश अंबानी की बिल्डिंग तक आने से पहले स्कॉर्पियो और इनोवा कार-दोनों के ड्राइवर पांच मिनट तक सायन में एक जगह रुके थे। जांच का फोकस इस सवाल पर केंद्रित हो गया है कि दोनों आरोपी आखिर सायन में ही क्यों रुके। क्या वह वहां किसी के निर्देश का इंतजार कर रहे थे?
क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी के अनुसार, दोनों ही गाड़ियां ठाणे से घटना वाली रात लगभग एक साथ निकली थीं। दोनों गाड़ियां एक दूसरे से 50 से 100 मीटर की ही बस दूरी पर थीं। रात 2 बजकर 18 मिनट पर मुकेश अंबानी के घर के पास स्कॉर्पियो छोड़ने के बाद स्कॉर्पियो का ड्राइवर इनोवा में बैठा और यहां से वह इनोवा में बैठे अपने साथी के साथ उसी ठाणे के रास्ते वापस गया, जिस रास्ते से कुछ घंटे पहले वह आया था।
सायन के सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि दोनों ही आरोपियों ने मास्क तो पहना ही था, फेस शील्ड भी पहनी हुई थी। ऐसा सिर्फ कोरोना की वजह से नहीं, अपनी शिनाख्त पूरी तरह छिपाने के मकसद से किया गया था। चूंकि यह सेंसटिव केस है, इसलिए इस केस को सुपरवाइज करने का जिम्मा अब एसीपी रैंक के अधिकारी नितिन अलकनुरे को सौंपा गया है। लेकिन पूरा इनवेस्टिगेशन अभी भी क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट यानी सीआईयू के पास ही है।
नितिन अलकनुरे सीआईयू की टीम के भी बॉस हैं। पिछले सप्ताह मुंबई क्राइम ब्रांच चीफ मिलिंद भारंबे ने बताया था कि इस केस के इनवेस्टिगेशन के लिए क्राइम ब्रांच की दस टीमें बनाई गई हैं। मुंबई में क्राइम ब्रांच की करीब डेढ़ दर्जन यूनिट्स हैं। हर यूनिट से एक–दो अधिकारी या सिपाही लिए गए हैं। इन सारे अधिकारियों और सिपाहियों को इस केस से जुड़े अलग-अलग काम सौंपे गए हैं।





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