मुंबई : महाराष्ट्र सहित पूरे देश में एक मई से १८ वर्ष से ऊपर के सभी लोगों को कोरोना का टीका देने की शुरुआत होगी। महाराष्ट्र में टीकाकरण के लिए योजना बनाई गई है। इसके लिए प्रतिदिन ६ से ७ लाख लोगों को टीका देने का लक्ष्य महाराष्ट्र सरकार ने निर्धारित किया है। हालांकि केंद्र से टीके की आपूर्ति समय पर न होने पर लक्ष्य प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।
एक मई से शुरू होने जा रहे व्यापक टीकाकरण की तैयारियों के लिए महाराष्ट्र सरकार ने टीकाकरण केंद्रों की संख्या बढ़ाने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने मुंबई के २२७ वार्डों में टीकाकरण केंद्र स्थापित करने का निर्देश मुंबई मनपा को दिया है। महाराष्ट्र में सीरम इंस्टीट्यूट का कोविशील्ड और भारत बायोटेक का कोवैक्सीन टीका लोगों को दिया जा रहा है। इन दोनों कंपनियों का तकरीबन १७ लाख टीका प्रति सप्ताह महाराष्ट्र को मिलता है। स्वास्थ्य विभाग की मानें तो प्रति सप्ताह राज्य को ४० लाख टीके की जरूरत है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे इस संबंध में केंद्र सरकार को सूचित कर चुके हैं। मौजूदा समय में ढाई से तीन लाख टीके प्रतिदिन लगाए जा रहे हैं लेकिन वैक्सीन की कमी के कारण राज्य में टीकाकरण कार्यक्रम प्रभावित हो रहा है। प्रदेश के कई टीकाकरण केंद्रों में वैक्सीन न होने के कारण टीके का काम रुका पड़ा है। अनुमान है कि २४ मई तक सीरम इंस्टीट्यूट से राज्य को पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध न हो सके क्योंकि सीरम इंस्टीट्यूट का २४ मई तक केंद्र सरकार को वैक्सीन आपूर्ति करने का अनुबंध है।
वैक्सीन की कमी होने के बावजूद भी महाराष्ट्र अन्य राज्यों की तुलना में देश में पहले नंबर पर बरकरार है। अभी तक महाराष्ट्र में एक करोड़ ३२ लाख ९० हजार ९६३ लोगों को टीके लगाए जा चुके हैं। मुंबई में २१ लाख २४ हजार ७८६, ठाणे में १० लाख १० हजार ५३ और पालघर में १ लाख ८५ हजार ७१० लोगों को टीके लगाए जा चुके हैं। टीकाकरण में राजस्थान दूसरे, उत्तर प्रदेश तीसरे, गुजरात चौथे और पश्चिम बंगाल पांचवें स्थान पर है।
वैश्विक कोरोना महामारी के कारण ट्रांसपोर्ट सेक्टर पूरी तरह से लड़खड़ा गया है। इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के सामने कई समस्याएं निर्माण हो गई हैं। ट्रांसपोर्टरों की मानें तो देश की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभानेवाले ट्रांसपोर्ट सेक्टर को प्रतिदिन १,००० करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
देशभर में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कारण हाहाकार मचा हुआ है। अति आवश्यक व आवश्यक सेवाओं को छोड़कर अन्य लेनदेन बंद हैं। कोरोना ट्रक चालकों और मालिकों के लिए मुसीबत बन गया है। कारखाने तो चल रहे हैं लेकिन दुकानें बंद हैं, जिसके कारण माल ढुलाई में बड़े पैमाने पर कमी आई है। ट्रांसपोर्ट कारोबार २५ प्रतिशत से भी कम दायरे में आकर सिमट गया है।





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