मुंबई, देश में संचार व्यवस्था को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए सड़कों के आधुनिकीकरण का कार्य लंबे अर्से से किया जा रहा है। लेकिन सुरक्षा की लिहाज से महामार्ग आज भी खतरनाक ही बने हुए हैं। इसलिए देश के विभिन्न हिस्सों से गुजरनेवाले हाइवे के आसपास कई गिरोह फलते-फूलते रहे हैं, जो अक्सर लूट, रेप और हत्या जैसे जघन्य वारदातों को अंजाम देते रहे हैं। ऐसे लुटेरों पर नकेल कसने में पुलिस और सरकारें लगभग नाकाम ही सिद्ध हुई हैं, लेकिन अब हाइवे के लुटेरों को अदालत ने एक फैसले के जरिए सख्त चेतावनी देने की कोशिश की है।
लगभग महीने भर पहले ८ अप्रैल को सैरुणा पुलिस थाने की हद में जयपुर हाइवे पर श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में बरजांगसर गांव निवासी गौरीशंकर सिद्ध हाइवे लुटेरों का शिकार बन गए थे। बाइक लूटने का प्रयास कर रहे लुटेरों का उन्होंने विरोध किया था, जिसके कारण लुटेरों ने उन्हें चाकुओं से गोद दिया था। नोएडा एसटीएफ की टीम ने २०२० के दिसंबर महीने में बावरिया गैंग से जुड़े आरोपी दिनेश उर्फ कमाल को इसी तरह के आरोपों में गिरफ्तार किया था। दिनेश अपने साथियों के साथ उत्तर प्रदेश और हरियाणा के यमुना एक्सप्रेस-वे व पलवल-मथुरा हाइवे रोड पर वाहनों को पंक्चर करके लूटपाट करता था। इसी साल २० जनवरी को ऐसे ही एक प्रयास के दौरान उसने एक कार में सवार १४ वर्षीय नाबालिग के साथ कुकर्म किया था। हाइवे पर ऐसे अपराधों की फेहरिस्त बहुत ही लंबी बन सकती है लेकिन इन वारदातों को अंजाम देनेवाले अपराधी बहुत ही मुश्किल से पुलिस के हत्थे चढ़ते हैं। चेन्नई-कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग-१६ पर लूटपाट के लिए ट्रक चालकों की हत्या करनेवाले १३ आरोपियों को मौत की सजा, जबकि ७ को उम्रकैद की सजा मिली है। अपराध की बर्बरता को देखते हुए कोर्ट ने तीन आरोपितों को दो बार फांसी पर लटकाने को कहा है।
लगभग १३ साल पहले चेन्नई-कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग क्र-१६ पर ट्रक चालकों एव क्लीनरों की हत्या के कई मामले लगातार सामने आए थे। कई ट्रक, ट्रक चालक और क्लीनर रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गए थे। जब इसका राज खुला तो हड़कंप मच गया। हुआ ऐसा था कि तमिलनाडु के कल्पकम से रायपुर छत्तीसगढ़ की ओर जा रही लॉरी के साथ चालक और क्लीनर गंतव्य पर नहीं पहुंचे, न ही उनका कुछ पता चला कि वो कहां गए, उनके साथ क्या हुआ? लॉरी के मालिक वीरप्पन कुप्पुस्वामी ने उन्हें ढूंढ़ने की हरसंभव कोशिश की लेकिन वह नाकाम रहे। बाद में कुप्पुस्वामी ने १७ अक्टूबर, २००८ को जिला मुख्यालय स्थित ओंगोल पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत दर्ज करा दी। पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि एक गिरोह ने इस अपराध को अंजाम दिया है। पुलिस ने मुख्य आरोपित सैयद अब्दुल समद उर्फ मुन्ना को गिरफ्तार कर लिया। मुन्ना से पूछताछ के दौरान लॉरी चालकों और क्लीनरों की सामूहिक हत्या जैसी चौंकानेवाली बातें सामने आर्इं।





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