मुंबई, महाराष्ट्र में १०वीं की परीक्षा होगी कि नहीं इसको लेकर छात्रों में संभ्रम की स्थिति बनी हुई थी। कल राज्य की शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड के बयान के बाद अब यह तय हो गया है कि राज्य में दसवीं की परीक्षा नहीं होगी। शिक्षामंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार १०वीं क्लास की बोर्ड परीक्षा को लेकर अपने पैâसले पर कायम है। फिलहाल देश और राज्य में कोरोना के संकट को देखते हुए असाधारण परिस्थितियां हैं। ऐसी स्थिति में राज्य में विद्यार्थी परीक्षा देने की मनोदशा में नहीं होने की बात वर्षा गायकवाड ने कही। दसवीं कक्षा के छात्रों को अंक प्रदान करने के लिए नीति निर्धारित की गई है। आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर विद्यार्थियों को पास किया जाएगा। वर्षा गायकवाड़ ने यह स्पष्ट किया कि ९वीं में प्राप्त किए गए अंकों के आधार पर १०वीं का परीक्षा परिणाम निर्धारित किया जाएगा। शिक्षामंत्री के कहने का तात्पर्य यह है कि ९वीं में की गई मेहनत दसवीं में काम आ गई। इसे ही कहते हैं नहले पे दहला। शिक्षा मंत्री ने कहा कि जून माह के अंत तक परीक्षाफल घोषित कर दिए जाएंगे। शिक्षा मंत्री के मुताबिक बोर्ड द्वारा जल्द ही छात्र मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक समय सारिणी घोषित की जाएगी। सभी स्कूलों को इस शेड्यूल का सख्ती से पालन करना होगा। गौरतलब हो कि मुंबई हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि राज्य का शिक्षा विभाग अगर दसवीं की परीक्षा नहीं लेगा तो बताए कि किस आधार पर विद्यार्थियों को आकलन किया जाएगा यानी उन्हें उत्तीर्ण करने का आधार क्या होगा? इसका खुलासा कल शिक्षामंत्री वर्षा गायकवाड ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए किया।
शैक्षणिक वर्ष २०२०-२१ में दसवीं की परीक्षा में बैठनेवाले सभी छात्रों को आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर उत्तीर्ण किया जाएगा। इसी प्रकार ११वीं में प्रवेश के लिए ऐच्छिक सीईटी की परीक्षा ली जाएगी। यह प्रवेश परीक्षा दसवीं के सिलेबस के आधार पर होगी। यह जानकारी स्कूली शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड ने कल पत्रकार परिषद में दी। उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण उत्पन्न हुई असामान्य स्थिति को देखते हुए व्यापक नीति तैयार की गई है। इस नीति को तैयार करते समय लगभग २४ बैठकें की गर्इं। इन बैठकों के माध्यम से शिक्षा विभाग के विशेषज्ञों, प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों, अभिभावक संघ के अलावा प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ भी विचार-विमर्श किया गया है। उक्त सभी समूहों से चर्चा के बाद उक्त निर्णय लिया गया है, ऐसी जानकारी वर्षा गायकवाड ने दी।
दसवीं कक्षा के छात्रों को अंक प्रदान करने के लिए निम्नलिखित नीति निर्धारित की गई है। इस मूल्यांकन नीति के अनुसार छात्रों को प्रत्येक विषय में १०० अंकों का मूल्यांकन किया जाएगा।





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