Home Crime कोरोना संकट में पड़ोसियों और दूर के रिश्तेदारों से संबंध हुए मजबूत

कोरोना संकट में पड़ोसियों और दूर के रिश्तेदारों से संबंध हुए मजबूत

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मुंबई, हम तुम चोरी से, बंधे एक डोरी से यह चर्चित गाना कोरोना काल में चरितार्थ होता हुआ दिखाई दे रहा है। इस संकट काल में पड़ोसियों, दोस्तों और दूरदराज के रिश्तेदारों से करीबियां बढ़ी हैं। पड़ोसियों के रिश्ते आपस में मजबूत हुए हैं और लोग एक दूसरे पर ज्यादा निर्भर हुए हैं। यह एक अध्ययन में खुलासा हुआ है। अध्ययन में पाया गया है कि ८१ फीसदी लोगों के आपसी संबंध कोरोना काल में मजबूत हुए हैं। इस संकट काल में नौकरों से लेकर वेंडरों तक के महत्व और योगदान को समझा गया है।
आपसी सौहाद्र्र और महामारी के प्रभाव को समझने के लिए भारत के सबसे बड़े कम्युनिटी ऐप्लीकेशन माइगेट ने एक नई रिपोर्ट ‘ट्रस्ट सर्कल’ का अनावरण किया है। माइगेट के सर्वे में पाया गया है कि कोरोना महामारी के कारण पड़ोसियों के साथ रिश्तों के महत्व को दोबारा स्थापित हुआ है। रिश्तों में फिर से बदलाव आने लगे। आस-पड़ोस के प्रति लोगों के दृष्टिकोण में बदलाव आया। इस अध्ययन में पहले और दूसरे स्तर के शहरों-अमदाबाद, बंगलुरु, चंडीगढ़, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, कोची, कोलकाता, मुंबई और पुणे से सभी आयुवर्गों के २,८६७ से अधिक भारतीयों ने हिस्सा लिया था। इस मुश्किल दौर में पड़ोसी ही ‘ट्रस्ट सर्कल’ के मुख्य स्तंभ के रूप में उभरे हैं। हर उम्र और हर धर्म के लोगों में यही
रूझान पाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार महामारी के चलते लोगों का दयालुता व सहानुभूति का स्वभाव सामने आया है। गेटेड एवं नॉन-गेटेड समुदायों में कम्युनिटी के साथ उनके रिश्ते मजबूत हुए हैं। लोग अपने सपोर्ट सिस्टम जैसे घरेलू काम करनेवाले नौकर, सिक्योरिटी गार्ड, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और घर में काम करनेवाले अन्य लोगों का महत्व समझ रहे हैं। साफ है कि ये रिश्ते गहरे हो रहे हैं, वहीं दूसरी लहर के बाद लोग फिर से सामान्य जीवन की ओर रुख करने की कोशिश में जुटे हैं। खैर, आगे देखना होगा कि भविष्य में यह रिश्ते क्या रुख लेते हैं।
माईगेट के सीईओ विजय अरीसेट्टी के अनुसार महामारी के चलते लोग फिर से आसपास के के लोगों और रिश्तेदारों के साथ जुड़े रहने की आवश्यकता को समझ रहे हैं। सभी क्षेत्रों के लोग अपने पड़ोस में ज्यादा भरोसा दर्शा रहे हैं। पड़ोसी परिवार, स्थानीय केमिस्ट या अपार्टमेंट के सिक्योरिटी गार्ड में आपसी सहयोग और मेल-मिलाप की भावना बढ़ रही है। इन प्रयासों से समुदायों के बीच भरोसे की कमी दूर होगी और हम एक साथ मिलकर इस मुश्किल समय में आई चुनौतियों को दूर करने के लिए काम कर सकेंगे।