मुंबई, आमतौर पर लोग किसी बच्चे को प्यार से मुन्ना कहकर बुलाते हैं लेकिन ज्यादार बच्चों का ‘मुन्ना’ उर्फ नाम बन जाता है। हालांकि मुन्ना उर्फ नामवाला हर शख्स मासूम नहीं होता। बीते सप्ताह एक ऐसे ही मुन्ना को बिहार एसटीएफ ने यूपी पुलिस की मदद से गिरफ्तार किया था। यह मुन्ना जुर्म की दुनिया का हेड मास्टर बन गया था। कुख्यात अपराधी मुन्ना को लोग मुन्ना मिश्रा के नाम से जानते हैं। लेकिन उसका असली नाम उसे खुद भी याद नहीं होगा। बीते बृहस्पतिवार को बिहार एसटीएफ ने उसे यूपी पुलिस की मदद से यूपी के देवरिया जिले से बेहद नाटकीय घटनाक्रम में गिरफ्तार किया।
बिहार और यूपी के सीमावर्ती जिलों को अपनी आपराधिक गतिविधियों से दहलानेवाला मुन्ना, बिहार के गोपालगंज जिला स्थित कटेया थाना क्षेत्र के पानन गांव का निवासी है। वह बीते कुछ वर्षों में गोपालगंज जिले की पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया था। इस कुख्यात मुन्ना के खिलाफ ५० से अधिक संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। विभिन्न पुलिस थानों में कुल मिलाकर उसके खिलाफ लगभग दो लाख रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था।
बताया जाता है कि मुन्ना मिश्रा दो दशक से अधिक समय से अपराध की दुनिया में सक्रिय था। करीब ७ साल पहले पुलिस ने उसे एक मामले में गिरफ्तार किया था। वर्ष २०१२ में हुई गिरफ्तारी के कुछ महीनों बाद वह जमानत पर छूट गया और उसके बाद फरार हो गया। वर्ष २०१८ में उसका एक सहयोगी हत्या के केस में जमानत पर बाहर आया तो मुन्ना उसके पास आने लगा, वहीं पर उसका परिचय एक कुख्यात बदमाश से हुआ। मुन्ना ने उससे एके-४७ खरीदी थी। उसी दौरान मुन्ना ने भोरे कस्बे में विकास सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी। बाद में वह बड़ी आपराधिक वारदातों को अंजाम देने लगा। मुन्ना व्यावसायियों और ठेकेदारों से रंगदारी वसूलने लगा। वह जबरन जमीनों पर कब्जा करता था।
बीती २४ मई की सुबह कटेया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आनेवाले जमुन्हा बाजार में शिक्षक दिलीप सिंह उर्फ पंडित की अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। मुन्ना मिश्रा और उसके साथियों ने ५० लाख की रंगदारी नहीं दिए जाने से नाराज होकर शिक्षक की हत्या की थी। बाइक सवारों ने एके-४७ से शिक्षक को छलनी कर दिया। इस मामले में मृत शिक्षक के बड़े भाई ने कुख्यात मुन्ना मिश्रा, पानन खास के अलकेश्वर मिश्रा, भाठवां के हरकेश मिश्रा, बभनी के धनंजय पांडेय, सिधरिया के इसराफिल देवान तथा जमुन्हा बाजार के मुन्ना जायसवाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। बिहार पुलिस और एसआईटी ने कुख्यात मुन्ना जायसवाल, हरकेश मिश्र व धनंजय पांडेय को तो गिरफ्तार कर लिया था लेकिन मुन्ना मिश्रा पुलिस के हाथ नहीं लगा।
मुन्ना हमेशा अकेले ही रहता था और वह अपने पास मोबाइल भी नहीं रखता था। साधारण बाइक पर हेलमेट लगाकर बोरी में एके-४७ रखकर चलता था। बिहार में आपराधिक वारदातों को अंजाम देने के बाद मुन्ना, यूपी भाग जाता था। वहां वह देवरिया, गोरखपुर, बलिया व तमकुही आदि जिलों में हुलिया व नाम बदलकर रहता था। एसटीएफ व बिहार के कई थानों की पुलिस यूपी पुलिस की मदद से सरहदी जिलों में बीते ६० दिनों से ऑपरेशन चला रही थी। बीते शुक्रवार की सुबह उसका सामना बाइक पर सवार मुन्ना से हो गया। एसटीएफ के जांबाज सिपाहियों ने मुन्ना को एके-४७ निकालने का कोई मौका नहीं दिया और गिरफ्तार कर लिया। मुन्ना मिश्रा ने स्वीकार किया कि एक-४७ उसने ८ लाख रुपए में खरीदी थी।
मुन्ना ने अपने गांव की ही मुस्लिम लड़की से विवाह किया था। विवाह के बाद उसने पत्नी का नाम अन्नू मिश्रा रख लिया। मुन्ना बीते एक वर्ष से अन्नू के साथ रामपुर महुआबारी में सौंदर्य प्रसाधन की दुकान चला रहा था। लोग मुन्ना को बाबा के नाम से जानते थे। दोनों पति-पत्नी पथरदेवा की दुकानों से सामान लाकर बेचते थे। लेकिन असल में मुन्ना के अपराधों में अन्नू भी बखूबी साथ देती थी। अन्नू बड़े से बैग में एके ४७ छिपाकर रखती थी। जमुन्हा मर्डर केस में अन्नू मिश्रा की मुख्य भूमिका होने की बात जांच में सामने आई है। देवरिया से मुन्ना की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसकी पत्नी अन्नू मिश्रा को भी गिरफ्तार किया है।





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