मुंबई, मुंबई में घर का सपना देख रहे लोगों को बिल्डरों द्वारा विभिन्न पुनर्विकास परियोजनाओं को सालों से लटकाकर रखा है। अब अधर में लटकी हुई विभिन्न योजनाओं के बारे में राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। राज्य का गृह निर्माण विभाग ने पुनर्विकास के लिए अटकी सभी झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (एसआरए) को अपने अधीन लेने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह जानकारी गृह निर्माण मंत्री जितेंद्र आव्हाड ने दी। इसी प्रकार अगर बिल्डर कोर्ट गए तो हम भी कोर्ट जाएंगे, ऐसा भी जितेंद्र आव्हाड ने कहा। उन्होंने कहा कि बंद परियोजनाओं को एसआरए के तहत कब्जे में लेकर स्वयं विकसित किया जाएगा। जिससे गरीबों को घर मिल सके, इसकी व्यवस्था की जाएगी। इसमें शिवशाही पुनर्वसन परियोजना (एसएसपीएल) के मार्फत फंड की योजना बनाई जाएगी। साथ ही पुनर्विकसित भवनों में गरीबों को मकान उपलब्ध कराए जाएंगे।
महाविकास आघाड़ी सरकार ने शहर में पुराने भवनों के पुनर्विकास में आनेवाली बाधाओं को दूर करने में आखिरकार सफल हो गई है। राज्य सरकार द्वारा जारी संशोधित नियमों के कारण अब ३० वर्ष से कम आयु के भवनों का भी पुनर्विकास संभव होगा। गृह निर्माण मंत्री जितेंद्र आव्हाड पुराने भवनों के पुनर्विकास में आ रही कठिनाइयों को दूर करने पर अड़े थे। आखिरकार नगर विकास विभाग ने इस संदर्भ में शासन निर्णय जारी किया है। शहर में इमारतों का निर्माण मुख्य रूप से बिल्डिंग रिपेयर एंड रिकंस्ट्रक्शन बोर्ड द्वारा किया जाता है। इन भवनों का निर्माण इतना घटिया है कि लगभग सभी का पुनर्विकास करना आवश्यक बन गया है। लेकिन इसके लिए विकास नियंत्रण नियमों में प्रावधान करना आवश्यक था। नए विकास नियंत्रण नियमावली के अनुसार, ३० वर्ष या उससे अधिक की इमारतों को सक्षम प्राधिकरण द्वारा खतरनाक घोषित किए गए भवनों का पुनर्विकास करना संभव है। इसके अलावा अब प्रधानमंत्री अनुदान योजना के तहत भवनों का पुनर्विकास और ३ चटई क्षेत्र मिलना संभव होगा।





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