मुंबई, आपमें से लगभग सभी ने कभी-न-कभी टीवी की खबरों में या अपने मोबाइल फोन पर दुनिया का सबसे तेज रेल परिचालन ट्रायल होते और उसे करीब ५७५ किमी/घंटे की रफ्तार तक पहुंचकर विश्व कीर्तिमान बनाते हुए देखा होगा। वर्ष २००७ में जिस कंपनी ने प्लेन की रफ्तार से ट्रेन चलाने का यह विश्व कीर्तिमान बनाया था, उसी कंपनी ने अब हिंदुस्थान में भी हाई-स्पीड रेल परिचालन का हिस्सा बनने में रुचि दिखाई है। फ्रांस की अलस्टॉम देश में प्राइवेट ट्रेन संचालन का हिस्सा बनना चाहती है। वो भी अपनी उसी रिकॉर्ड विनर टीजीवी ट्रेन के साथ।
गत वर्ष भारतीय रेलवे ने पूरे देश में १०९ जोड़ी प्राइवेट ट्रेन चलाने का फैसला किया था, जिन्हें १६० किमी/घंटे की रफ्तार पर चलाने की योजना थी। ३०,००० करोड़ रुपए की इस परियोजना में निजी कंपनियों ने वैसे तो अपेक्षा से काफी कम रुचि दिखाई थी, फिर भी जीएमआर हाइवे, आईआरसीटीसी, आईआरबी इंफ्रा, क्यूब हाइवे, मेघा इंफ्रास्ट्रक्चर और सीएएफ इंडिया जैसी कंपनियों ने इसमें प्रारंभिक रुचि ली थी। हालांकि, फाइनेंसियल बिल्डिंग आते-आते मैदान में आईआरसीटीसी और मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा कोई कंपनी नहीं बची थी। इन दोनों कंपनियों ने भी महज दो क्लस्टर में ही ट्रेनें चलाने में रुचि दिखाई थी, जबकि रेलवे ने कुल १२ क्लस्टर्स में निजी ट्रेनें चलाने के लिए बोली आमंत्रित की थी। अब अलस्टॉम इंडिया इन दोनों कंपनियों, आईआरसीटीसी और मेघा इंजीनियरिंग के अलावा एक और कंपनी के साथ हाथ मिलाना चाहती है, ताकि वो हिंदुस्थान में अपनी टीजीवी चला सके।





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