मुंबई, आमतौर पर जब कोई सामान्य व्यक्ति किसी गलती या मामूली गुनाह के कारण पुलिस के चक्कर में फंसता है तो पुलिस थानों में उसे इतना डराया जाता है, मानों कानून की किताब में लिखी सभी धाराओं के तहत उसे सजा दे दी जाएगी। दूसरी तरफ बड़े व पेशेवर अपराधी बेखौफ होकर कानून तोड़ते रहते हैं। हत्या, बलात्कार, डवैâती, रंगदारी वसूली जैसे संगीन वारदातों को अंजाम देते हैं और पुलिस व कानून का मजाक उड़ाते हैं। हरियाणा व राजस्थान पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुका ढाई लाख रुपए का इनामी बदमाश व कुख्यात गैंगस्टर विक्रम उर्फ पपला गुर्जर इसका प्रमाण है। पपला को हत्या के एक और मामले में अदालत ने बीते सोमवार को दोषी करार दिया।
पेशे से पहलवान रहे विक्रम उर्फ पपला गुर्जर के गैंगस्टर बनने की कहानी बड़ी ही दिलचस्प है। पपला, हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में खैरोली गांव का निवासी है। वह पहलवानी का शौक रखता था। करीब ७ साल पहले खैरोली निवासी उसके गुरू शक्ति गुर्जर उर्फ दुधिया की रंजिश के कारण कुछ लोगों ने हत्या कर दी थी। पहलवान पपला को लगा कि यदि उसने अपने गुरू की हत्या का बदला नहीं लिया तो लोग उसका मजाक उड़ाएंगे। इसी सोच ने २८ वर्ष के पपला को महज कुछ ही दिनों में दो राज्यों का मोस्ट वांटेड अपराधी बना दिया।
पपला और उसके साथी वीरेंद्र ने अपने गुरु शक्ति गुर्जर की हत्या का बदला लेने की कसम खाई थी। इसी कसम के कारण उसने वर्ष २०१४ में गांव के संदीप फौजी नामक युवक की हत्या करके जुर्म की दुनिया में पहला कदम रखा। पपला कोर्ट के बाहर गवाहों को धमकाने और उन पर हमला करने के लिए कुख्यात हो गया। संदीप फौजी की हत्या के मामले की पैरवी संदीप की मां विमला कर रही थी। पपला ने पहले विमला को समझाने व डराने का भरपूर प्रयास किया लेकिन विमला पीछे हटने को तैयार नहीं हुई। जिससे नाराज पपला ने विमला की २१ अगस्त २०१५ को गांव में ही गोली मारकर हत्या कर दी। उस रात विमला घर ही में थी। रात १२ बजे के दौरान पपला अपने ६ अन्य साथियों के साथ उसके घर में घुसा और उन लोगों ने विमला पर अंधाधुंध गोलियां बरसार्इं। फॉरेंसिक जांच से पता चला कि विमला को २३ गोलियां मारी गई थीं। इसमें दो हथियारों का इस्तेमाल हुआ था जिसमें एक ९एमएम की पिस्टल थी और दूसरा देसी कट्टा। विमला की मौत के बाद उसके बिहारीपुर निवासी भाई महेश, दोनों संदीप फौजी और विमला के कत्ल की पैरवी करने लगे। पपला ने एक बार फिर वही कहानी दोहराई। वर्ष २०१६ में पपला के गिरोह ने महेश की गुलावला के पास गोली मारकर हत्या कर दी। महेश की हत्या के बाद उसके पिता श्रीराम ने तीनों की हत्या के मामलों की पैरवी शुरू की, जिसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। इसे पपला के गिरोह का दुस्साहस ही कहेंगे कि पुलिस सुरक्षा के बावजूद श्रीराम को मौत के घाट उतार दिया था।





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