मुंबई, पूरे महाराष्ट्र में चिकनगुनिया, डेंगू और मलेरिया जैसी मानसूनी बीमारियों की संख्या में अचानक ४० से ५० प्रतिशत की वृद्धि को देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने सभी जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को सर्वेक्षण करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही उन्होंने जिन जिलों में मौसमी बीमारी के सर्वाधिक मरीज मिल रहे हैं, वहां घर-घर सर्वे तेज करने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं, उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को सूचना और शिक्षा प्रकोष्ठ (आईईसी) के माध्यम से प्रत्येक जिले में इसे लेकर गतिविधियों का सख्ती से पालन करने और जागरूकता बढ़ाने के लिए भी कहा है। टोपे ने कहा कि जिन जिलों में चिकनगुनिया, डेंगू और मलेरिया के सबसे अधिक मामले हैं, वहां के जिला प्रशासन को क्षेत्रों का सर्वेक्षण करने का आदेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक मामलों वाले जिलों पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है। साथ ही मौसमी बीमारियों को रोकने के उपाय किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले से मौसमी बीमारियों के बढ़ते मामलों के प्रमुख कारणों की रिपोर्ट मांगी गई है।
महाराष्ट्र में इस साल जनवरी से अक्टूबर तक चिकनगुनिया बुखार के दो हजार छह मामलों की पुष्टि हुई है। बीते चार सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल २०१७ में एक हजार ४३८ मामले सामने आए थे। इसी तरह साल २०१८ में एक हजार नौ और २०१९ में एक हजार ६४६ मामले सामने आए थे। इसी तरह साल २०२० के महामारी वर्ष में सभी बीमारियों की तरह चिकनगुनिया में कमी आई थी। बीते साल इस बीमारी से ७८२ लोग पीड़ित हुए थे।
राज्य के स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने मौसमी बीमारियों के बढ़ने के लिए जलवायु परिस्थितियां और रुक-रुक कर होनेवाली बारिश को जिम्मेदार ठहराया। इन परिस्थितियों ने इस साल बीमारियों में उल्लेखनीय वृद्धि में योगदान दिया है। वहीं इस साल भी डेंगू के मामले बढ़े हैं। अब तक लगभग १० हजार डेंगू के मामले सामने आए हैं। साथ ही डेंगू से २२ की मौतें हो चुकी हैं। वहीं पिछले साल डेंगू के तीन हजार ३५६ मामले सामने आए थे, जबकि १० की मौत हुई थी।
चिकनगुनिया बुखार घातक नहीं है। हालांकि, इसके शिकार मरीज खासकर बुजुर्गों को ज्यादा परेशानी होती है। यह कमजोरी के साथ शरीर में दर्द और चलने में कठिनाई पैदा कर सकता है। इसके अलावा, चिकनगुनिया के अधिकांश लक्षण कोविड-१९ और डेंगू के समान पाए गए हैं। इस बीच पिछले दो वर्षों की तुलना में इस वर्ष वृद्धि हुई है। एक आंकड़े के मुताबिक पुणे मनपा क्षेत्र में सर्वाधिक २१५ चिकनगुनिया के मामले सामने आए हैं। वहीं पुणे जिले में ३५४ मामले मिले हैं।





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