मुंबई, एसटी महामंडल के राज्य सरकार में विलय को लेकर हड़ताल पर चल रहे एसटी कर्मचारियों की मांगों को लेकर सरकार का रुख सकारात्मक दिखाई दे रहा है। राज्य के परिवहन मंत्री और एसटी महामंडल के अध्यक्ष अनिल परब ने हड़ताली कर्मचारी शिष्टमंडल को आश्वासन दिया है कि कर्मचारियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें सरकारी कर्मचारियों की तरह वेतन देने की मांग पर अध्ययन कर सरकार सकारात्मक फैसला लेगी। साथ ही विलय के संदर्भ में नियुक्त समिति को अपनी रिपोर्ट जल्द से जल्द देने को कहा जाएगा। परब ने कहा कि हमारी इच्छा है कि कर्मचारियों का नुकसान न हो। महामंडल की तरफ से कहा गया है कि शिष्टमंडल को दिए गए आश्वासन से विधायक गोपीचंद पडलकर और सदाभाऊ खोत ने संतोष प्रकट किया। एसटी कर्मचारियों की मांगों को लेकर भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर, रयत क्रांति संगठन के संस्थापक और विधायक सदाभाऊ खेत के नेतृत्व में कर्मचारियों ने एसटी महामंडल के अध्यक्ष अनिल परब से सह्याद्रि गेस्ट हाउस में मुलाकात की। इस दौरान एसटी महामंडल के उपाध्यक्ष व प्रबंध निदेशक शेखर चन्ने, वित्तीय सलाहकार व मुख्य लेखाधिकारी मंदार पोहरे मौजूद थे। अनिल परब ने कहा कि कर्मचारी संगठनों की मांगों के अनुसार एसटी कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों की तरह 28 फीसदी महंगाई भत्ता और आवास भत्ता दिया गया है। सिर्फ वेतन बढ़ाने को लेकर दिवाली के बाद चर्चा करने को कहा गया था। हड़ताल की वजह से एसटी दिक्कत में आ गई है। घाटे में एसटी सेवा चलाने की महामंडल की इच्छा नहीं है, ऐसे में आय के स्रोत बढ़ाने के अलग-अलग प्रयास किए जा रहे हैं। परब ने शिष्टमंडल से कहा कि एसटी महामंडल के राज्य सरकार में विलय को लेकर बंबई उच्च न्यायालय के आदेश अनुसार राज्य सरकार ने एक समिति का गठन किया है। यह समिति 12 सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी। यदि समिति विलय की सिफारिश को मान्य करती है तो हम भी इसे स्वीकार कर लेंगे। परब ने कहा कि समिति को जल्द ही अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है।





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