मुंबई, मुंबई की लाइफ लाइन कही जानेवाली लोकल ट्रेनों में प्रतिदिन करीब दर्जनभर यात्री अपने लापरवाही से रेल हादसों का शिकार होते हैं। इनमें कुछ की मौत हो जाती है तो कई गंभीर रूप से जख्मी भी होते हैं। रेलवे के ऐसे हादसाग्रस्तों की शिनाख्त करके शवों का अंतिम संस्कार कराना रेलवे के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती होती है। कई बार शिनाख्त के अभाव में शवों का अंतिम संस्कार महीनों तक रुका रह जाता है। ऐसे शवों को संभालकर रखना पुलिस और अस्पताल प्रशासन के लिए सिरदर्द बन जाता है। ऐसी लावारिस लाशें इन दिनों बांद्रा रेलवे पुलिस के लिए सिरदर्द बन गई हैं।
बता दें कि ३ सितंबर, २०२१ को एक करीब ३७ वर्षीय हिंदू शख्स सांताक्रुज रेलवे स्टेशन के पास लोकल ट्रेन की चपेट में आकर जख्मी हो गया था। कूपर अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। इसी तरह १३ अक्टूबर को खार व बांद्रा के बीच एक करीब ४० वर्षीय व्यक्ति की लोकल ट्रेन की ठोकर लगने से मौत हो गई थी। तीसरी घटना २८ अक्टूबर को खार व सांताक्रुज के बीच घटी थी, जिसमें ५५ वर्षीय शख्स की मौत हो गई थी। इस घटना के दो दिन बाद यानी ३१ अक्टूबर को एक ५५ वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति की बांद्रा व माहिम के बीच लोकल ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। इसी तरह एक ५५ वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति की लाश ३ नवंबर को बांद्रा टर्मिनस के प्लेटफॉर्म नंबर ७ पर मिली थी, जबकि १३ नवंबर को ५५ वर्षीय हिंदू व्यक्ति की खार-सांताक्रुज के बीच लोकल ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। इन तमाम लोगों की लाशें कूपर अस्पताल में रखी हुई हैं। पुलिस मृतकों के परिजनों का इंतजार कर रही है ताकि शवों का अंतिम संस्कार किया जा सके।





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